जलवायु परिवर्तन से प्रभावित मध्य पूर्व में सूखती नदियों और कम होती बारिशों के बीच जमीन के नीचे जमा पानी पहले की अपेक्षा और महत्वपूर्ण हो चुका है। समस्या ये है कि कोई नहीं जानता कितना भूजल बचा है। दुनिया में जलवायु परिवर्तन और सूखे से सबसे ज्यादा खतरे का सामना कर रहे देशों में एक है इराक और वहां इस साल गेहूं की बंपर फसल हुई, लेकिन उसमें एक अदृश्य चीज की करामात है, उस जादुई चीज ने ट्युनीशिया में खजूर के सर्वाधिक महत्वपूर्ण मरु-उद्यानों की संख्या बढ़ाने में भी मदद की है, युद्ध के बावजूद यमन में कृृषि कार्य को गतिशील रखा है और लीबिया के गहमागहमी से भरे तटीय शहरों में पानी की सप्लाई सुनिश्चित की है। वह चीज है भूमिगत जल-पृथ्वी के नीचे पानी का भंडार। इस पानी ने पश्चिम एशिया के शुष्क भूगोल में हमेशा से एक अहम भूमिका निभाई है।
यमन में सौर ऊर्जा पंप का इस्तेमाल करके भूजल को जमीन पर लाया जाता है ताकि खेती हो सके। उल्लेखनीय है कि भूजल या भूगर्भिक जल धरती की सतह के नीचे चट्टानों के कणों के बीच के अंतरकाश या रन्ध्राकाश में मौजूद जल को कहते हैं। सामान्यत: जब धरातलीय जल से अंतर दिखाने के लिए इस शब्द का प्रयोग सतह से नीचे स्थित जल के रूप में होता है तो इसमें मृदा जल को भी शामिल कर लिया जाता है। हालांकि,यह मृदा जल से अलग होता है जो केवल सतह से नीचे कुछ ही गहराई में मिट्टी में मौजूद जल को कहते हैं। भूजल एक मीठे पानी के स्रोत के रूप में एक प्राकृृतिक संसाधन है, जो भूजल पृथ्वी के अन्दर अत्यधिक गहराई तक रिसकर प्रविष्ट हो चुका है और मनुष्य द्वारा वर्तमान तकनीक का सहारा लेकर नहीं निकला जा सकता या आर्थिक रूप से उसमें उपयोगिता से ज्यादा खर्च आएगा,वह जल संसाधन का भाग नहीं है।
संसाधन केवल वहीं हैं जिनके दोहन की संभावना प्रबल और आर्थिक रूप से लाभकार हो। जल चक्र पृथ्वी पर पानी के चक्रण से संबंधित है। इसमें इस बात का निरूपण किया जाता है कि जल अपने ठोस, द्रव और गैसीय (बर्फ या हिम, पानी और भाप या वाष्प) रूपों में कैसे एक से दूसरे में बदलता है और कैसे उसका एक स्थान से दूसरे स्थान को परिवहन होता है । भूजल भी जलचक्र का हिस्सा है और इसमें भी पानी के आगमन और निर्गमन के स्रोत और मार्ग होते हैं। पश्चिमी एशिया पर संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (इस्कवा) की 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक कम से 10 अरब देशों के लिए ताजे पानी का प्रमुख स्रोत बना हुआ है, जिस तरह बारिशों पर जलवायु परिवर्तन का असर पड़ता है और प्रचंड गर्मियां अधिकांश नदियों और झीलों को सुखा देती हैं, उन स्थितियों में भूजल और ज्यादा महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
खुशी है कि भूजल को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। खाड़ी क्षेत्र में भूजल पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन ये एक पेचीदा स्रोत भी है। भूजल का प्रबंधन कैसे करना है, ये इस पर भी निर्भर करता है कि वो किस किस्म की जमीन में या चट्टान के नीचे जमा है, कितनी गहराई में है, कैसे बहता है और नदियों और झीलों जैसे किसी नजदीकी जमीनी पानी से किस तरह जुड़ा है। ये इस पर भी निर्भर करता है कि भूजल किसी अक्षय स्रोत से निकलता है या नहीं। उदाहरण के लिए पश्चिम एशिया में कुछ भूजल, जमीन के नीचे हजारों साल से जमा होता रहा है। कुछ मिलाकर कहा जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन ने मनुष्य के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, उससे भूजल कैसे वंचित रह सकता है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में ङ्क्षजदगी और कठिन हो जाएगी, इसमें कोई दो राय नहीं है। जलवायु परिवर्तन की वजह से इन दिनों खाद्यान्न, पेयजल, पर्यावरण सहित अन्य क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। इसकी वजह से अनाजों की उपज प्रभावित हो रही है। सीफूड्स का उत्पादन भारी पैमाने पर घटा है। जबकि इस पर करीब चार अरब लोग निर्भरशील हैं। यदि अपनी सतह से भू-जल और नीचे चला जाता है तो आने वाले दिनों में जल संकट और गहरा जाएगा। खासतौर पर मध्य-पूर्व के देशों में पानी का रिजर्व समाप्त हो जाने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। यह निहायत ङ्क्षचता का विषय है। इस पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है और जलवायु परिवर्तन पर अंकुश लगाने के लिए कारगर कदम उठाने की जरुरत है।