अधिक मास में सोमवार के व्रत का विशेष महत्व है। भगवान शिवजी की विशेष कृपा-प्राप्ति के लिए शिवपुराण में विविध व्रतों का उल्लेख है, जिसमें श्रावण मास के सोमवार का व्रत प्रमुख हैं। श्रावण मास के सभी सोमवार को व्रत रखा जाता है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि इस बार प्रथम (अधिक) श्रावण मास का तृतीय सोमवार 24 जुलाई को पड़ रहा है। श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है। पार्थिव शिवलिंग स्वच्छ मिट्टी, गंगालजल से निर्माण करके विधि-विधानपूर्वक पूजा किया जाता है। श्रावण मास में शिवभक्त कांवड़ यात्रा करके भगवान शिवजी को जल अर्पित कर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे भगवान शिवजी प्रसन्न होकर भक्तों को सुख-समृद्धि का वरदान देते हैं।
शिवजी ऐसे होंगे प्रसन्न : ज्योतिषविद् ने बताया कि अपने दैनिक जीवन में पूर्ण शुचिता के साथ भगवान शिवजी की अर्चना करनी चाहिए। शिवभक्त व्रतकर्ता को प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होना चाहिए। तत्पश्चात् स्वच्छ वस्त्र धारण करके अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गन्ध व कुश लेकर विधि-विधानपूर्वक व्रत का संकल्प लेना चाहिए। सम्पूर्ण दिन निराहार रहते हुए सायंकाल पुनः स्नान कर स्वच्छ व धारण करके पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख होकर भगवान शिवजी की विधि-विधान पूर्वक पूजा करनी चाहिए।
भगवान शिवजी का अभिषेक करके उन्हें विविध वस्तुएं जैसे—वस्त्र, यज्ञोपवीत, आभूषण, सुगन्धित द्रव्य के साथ बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार, ऋतुपुष्प, नैवेद्य आदि जो भी सुलभ हो, अर्पित करके शृंगार करना चाहिए। तत्पश्चात् धूप-दीप प्रज्वलित करके आरती करनी चाहिए। पंचोपचार, दशोपचार अथवा षोडशोपचार पूजा-अर्चना करनी चाहिए।