कई बार लोगों से यह कहते हुए सुना है कि भगवान की पूजा तो किसी भी समय की जा सकती है। भगवान यह नहीं कहता है कि मुझे फलां वक्त पर मत पूजो। यह सही है कि भगवान हमें यह नहीं कहता है कि मुझे फलां समय पर पूजा या मत पूजो। लेकिन शास्त्रों में पूजा के लिए भी कुछ नियम कायदे बनाए गए हैं। साथ ही देवी देवताओं की पूजा करते समय कुछ सावधानी बरतने को भी कहा गया है।
स्नान किए बिना नहीं करनी चाहिए पूजा : साफ और स्वच्छ तरीके से की गई पूजा का फल भी शुभ मिलता है। पूजा में अगर स्वच्छता का ध्यान नहीं रखेंगे तो देवी देवता नाराज हो जाते हैं और जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साफ और स्वच्छ तरीके से तात्पर्य यह है कि हमें पूजा करने से पहले शौच व स्नान आदि से निवृत होना चाहिए।
आरती के समय नहीं करनी चाहिए पूजा : जब आरती चल रही हो उस समय पूजा नहीं करना चाहिए। पूजा के समय पूजा और आरती के समय आरती करनी चाहिए। आरती पूजा में शामिल नहीं है क्योंकि आरती ईश्वर की वंदना और भजन में शामिल है।
दोपहर के समय नहीं करनी चाहिए पूजा : पूजा के नियमों में से एक यह भी है कि दोपहर के समय देवी देवताओं की पूजा नहीं करना चाहिए। इस समय की गई पूजा स्वीकार्य नहीं होती है।
सायंकाल की आरती के बाद नहीं करनी चाहिए पूजा : सायंकाल की आरती के बाद पूजा करना वर्जित बताया गया है। रात्रि के समय सभी तरह के धार्मिक कर्म वेदों द्वारा निषेध माने गए हैं। हालांकि कुछ विशेष दिन जैसे दिवाली, होली, करवा चौथ आदि त्योहार पर पूजा कर सकते हैं लेकिन बाकी दिन सायंकाल की आरती के बाद पूजा नहीं करना चाहिए।
माहवारी के दौरान नहीं करनी चाहिए पूजा : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पूजा नहीं करनी चाहिए। इस समय उपवास रख सकते हैं लेकिन मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए।
जन्म व मृत्यु के समय सूतक में नहीं करनी चाहिए पूजा : हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार जब घर में किसी का जन्म या मृत्यु होती है तब सूतक लग जाता है, ऐसे समय देवी देवताओं की पूजा करना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है।