अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने हाल ही में एक ऐसे उल्कापिंड के बारे में पता लगाया है जो तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इस उल्कापिंड के पृथ्वी की ओर आने की खबर मिलते ही दुनियाभर के वैज्ञानिक सतर्क हो गए हैं। नासा के मुताबिक, उसने एक विमान से बड़े आकार के एक क्षुद्रग्रह को रविवार यानी 16 जुलाई पृथ्वी की ओर बढ़ते देखा गया। जिसका आकार 910 फुट है जो 2.26 मिलियन मील की दूरी पर पृथ्वी के सबसे निकट होगा। नासा के आंकड़ों से पता चलता है कि ये क्षुद्रग्रह 1943 में बृहस्पति और 1944 में पृथ्वी के पास से गुजरा है। इस उल्कापिंड की रफ्तार कथिर तौर पर 44,562 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है। हालांकि इसके पृथ्वी से टकराने की संभावना नहीं है।

बता दें कि अंतरिक्ष में हमारी पृथ्वी के अलावा ग्रह, तारे और तमाम उल्कापिंड भी मौजूद हैं। उल्कापिंड भी अंतरिक्ष में तेजी से घूम रहे हैं जो कई बार पृथ्वी या फिर किसी दूसरे ग्रह की ओर चले जाते हैं। पृथ्वी की ओर आ रहे इस इस उल्कापिंड को वैज्ञानिकों ने एस्ट्रेरॉइड 2023 एमजी6 नाम दिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अंतरिक्ष में ज्यादातर एस्टेरॉइड बृहस्पति और मंगल ग्रह की कक्षाओं के बीच के अंतरिक्ष में पाए जाते हैं। जो दूसरे ग्रहों की तरह ही हमेशा घूमते रहते हैं। लेकिन कई बार ये दूसरे खगोलीय पिंडों से चकरा जाते हैं। नासा की रिपोर्ट में कहा गया है कि एस्ट्रेरॉइड 2023 एमजी6 तेजी से धरती की ओर आ रही है।  नासा के सेंटर फॉर नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज ने इस एस्टेरॉइड का नामकरण किया है। एस्टेरॉइड 2023 एमजी6 पृथ्वी के करीब से गुजरेगा लेकिन इससे पृथ्वी को कोई नुकसान होने की संभावना नहीं है। क्योंकि ये पृथ्वी से  2.26 मिलियन मील दूर से ही गुजर जाएगा।

हालांकि ऐसा भी माना जा रहा है ये क्षुद्रग्रह अब तक पृथ्वी के पास से गुजर चुका होगा। किसी स्टेडिय या फिर हवाई जहाज के आकार के इस क्षुद्रग्रह को अमोर ग्रुप का एस्टेरॉइड बताया जा रहा है। बता दें कि अमोर एस्टेरॉइड पृथ्वी ओर मंगल के बीच पाए जाते हैं। बता दें कि उल्कापिंड काफी भारी भरकम पत्थर जैसे होते हैं। जो अंतरिक्ष में तेजी से घूमते हैं और कई बार ये पृथ्वी की ओर आने लगता है, हालांकि, जब ये पृथ्वी से टकराते हैं तो उस स्थान पर भारी नुकसान होता है। लेकिन इनमें से ज्यादातर उल्कापिंड पृथ्वी के निकट आते ही हाई स्पीड और डेंस एयर की वजह से जलकर नष्ट हो जाते हैं। 25 मीटर से छोटे उल्कापिंड से कोई खतरा नहीं होता। ये पृथ्वी की सतह तक आ सकते हैं। हालांकि इनका आकार अगर 25 मीटर से ज्यादा और एक किलोमीटर से कम है तो जहां ये गिरते हैं उस स्थान पर तबाही मचा सकते हैं। हालांकि, इनसे पृथ्वी नष्ट नहीं होगी।