बोलपुर : लोकतंत्र में अक्सर सत्ता साझेदारी की जरूरत का जिक्र करते हुए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने अगले साल होने वाले आम चुनावों के लिए एक संघीय मोर्चा बनाने के सिलसिले में गैर-भाजपा दलों के बीच जारी चर्चा का स्वागत किया है। अपनी हालिया भारत यात्रा के दौरान यहां अपने पैतृक आवास पर एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि केंद्र को मणिपुर में शांति स्थापित करने के लिए पुरजोर तरीके से हस्तक्षेप करना चाहिए। सेन (89) ने कहा कि मुझे लगता है कि लोकतंत्र अक्सर सत्ता साझेदारी की मांग करता है, लेकिन अक्सर बहुमत, अल्पमत वाले दलों को वह ताकत हासिल नहीं करने देता और अल्पमत को एक संकटपूर्ण स्थिति में छोड़ देता है।

अर्थशास्त्री-दार्शनिक ने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए विपक्षी दलों के लिए सत्ता संतुलित करने का एकमात्र तरीका कमजोर बने रहने के बजाय एक दूसरे के साथ खड़े रहना है। उन्होंने कहा कि (पिछले महीने) पटना में हुई (विपक्ष की) बैठक में जो कुछ हुआ, उससे कुछ ऐसा ही जाहिर होता है। बेंगलुरु में सोमवार और मंगलवार को 26 विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक होने वाली है। कांग्रेस, जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अलावा तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) जैसे बड़े विपक्षी दल बैठक में शामिल होंगे। इसमें, 2024 के लोकसभा चुनाव में एकजुट होकर लडऩे की रणनीति की रूपरेखा तैयार करने की उम्मीद है। सेन ने मणिपुर में स्थिति पर कहा कि सिर्फ इस चीज की जरूरत है कि केंद्र सरकार न्यायसंगत, पुरजोर तरीके से हस्तक्षेप करे।