मुंबई : अविभाजित शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को जारी उच्चतम न्यायालय के नोटिस के बाद उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत करने वाले 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए। इससे पहले दिन में उच्चतम न्यायालय ने उस याचिका पर महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय से जवाब मांगा, जिसमें जून 2022 में राज्य में सरकार गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन करने वाले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य शिवसेना विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं का जल्द निपटारा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक सुनील प्रभु की याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय को इस संबंध में नोटिस जारी किया। प्रभु ने वर्ष 2022 में पार्टी से बगावत करने वाले शिंदे और अन्य विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दायर की थीं। प्रभु ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को उच्चतम न्यायालय की ओर से जारी नोटिस के बाद महाराष्ट्र के 16 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की प्रक्रिया में तेजी आनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि शीर्ष अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष से अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय देने में देरी के कारण भी पूछे हैं।