आईआईटी रुड़की ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई पहल की है। बीते दिनों सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक संस्थान परिसर में पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों को एंट्री नहीं दी गई। केवल ई-रिक्शा और साइकिल ही संस्थान में चले। संस्थान के डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर भी पैदल ही कार्यालय पहुंचे।

कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए सरकार कई प्रयास कर रही है। आईआईटी रुड़की भी इस मुहिम में जुड़ा है। कार्बन उत्सर्जन से ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए नई पहल की गई है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करना है। बीते गुरुवार को सुबह आठ बजे के बाद किसी भी डीजल, पेट्रोल वाहन को परिसर में एंट्री नहीं मिली। खंजरपुर गेट और मेन गेट से एंट्री बंद कर दी गई। डायरेक्टर डॉ। केके पंत भी पैदल ही निकले।

डॉ. पंत ने कहा कि यदि हम परिसर में प्रतिदिन पांच किमी की औसत दूरी तय करने वाली 500 चौपहिया कारों से कार्बन उत्सर्जन की गणना करें तो उत्सर्जन प्रतिदिन जलने वाले 217 किलोग्राम कोयले के बराबर है।