कई लोग रोजाना परफ्यूम और डिओडोरेंट का इस्तेमाल करते हैं। इससे शरीर की बदबू से छुटकारा मिलने के साथ-साथ मूड भी फ्रेश रहता है। ये बेहतर स्मेल के साथ हमारा कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है। परफ्यूम या डिओडोरेंट को डायरेक्ट स्किन पर लगाने से कई बार साइड इफेक्ट्स भी नजर आ सकते हैं। इसलिए इसे कपड़ों पर लगाना एक बेहतर ऑप्शन है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि परफ्यूम और डिओडोरेंट के इतने सारे फायदे होने के बाद भी इसे प्लेन पर ले जाने पर रोक क्यों लगाई गई है।

परफ्यूम में आखिर ऐसा क्या होता है कि एयरलाइन कंपनियां इसे हवाई जहाज पर ले जाने से रोकती हैं? अगर आपको भी इसके बारे में नहीं पता, तो आइए आज हम आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं। दुनियाभर की एयरलाइन कंपनियां इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के नियमों का पालन करती है, जिसके तहत परफ्यूम या डिओडोरेंट को केबिन के अंदर लाना मना है।  प्लेन में परफ्यूम और डिओडोरेंट ले जाने पर सख्त मनाही है, लेकिन क्यों?

आइए जानते हैं। दरअसल, परफ्यूम एक ज्वलनशील वस्तु होती है, जिसमें आग पकडऩे का खतरा काफी अधिक होता है। परफ्यूम में अल्कोहल की मात्रा होती है, इसलिए इसमें आसानी से आग लग सकती है। इसके अलावा गैर-अल्कोहलिक परफ्यूम में भी कुछ ऐसे घटक होते हैं, जो उन्हें ज्वलनशील बनाते हैं। परफ्यूम के ज्वलनशील होने की वजह से ही इसे प्लेन में ले जाने नहीं दिया जाता है। यदि कभी किसी कारण से प्लेन में आग लग जाती है, तो परफ्यूम की वजह से यह और भयानक रूप ले सकती है। हालांकि, लगेज और बैगेज के अंदर परफ्यूम ले जाया जा सकता है।

कई एयरलाइन की वेबसाइट पर ए साफ लिखा है कि चेक-इन बैगेज या लगेज बैगेज में परफ्यूम नहीं ले जाया जा सकता है। हालांकि विस्तारा में ये बताया गया है कि परफ्यूम को दोनों में ले जाने की अनुमति है लेकिन इसकी मात्रा कम होनी चाहिए। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के तहत ऐसी ज्वलनशील वस्तुएं दो किलो या लीटर से अधिक ले जाने की अनुमति नहीं है।