कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मिली हार तथा विपक्षी दलों के गोलबंद होने को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभी से ही चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमत्रियों एवं उपमुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की। भाजपा ने केंद्र सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाने के लिए महाजनसंपर्क अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। उसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अलग से बैठक कर चुनावी तैयारियों के संबंध में विचार-विमर्श किया। उस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, महासचिव सुनील बंसल, संगठन महासचिव बीएल संतोष शामिल हुए।
पिछले 5 एवं 6 जून को हुई मैराथन बैठक में पार्टी के प्रदर्शन को बेहतर करने की रणनीति पर बातचीत हुई। लोकसभा चुनाव में विपक्षी चुनौतियों से निपटने के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का आकार बढ़ाने एवं संगठन में बदलाव करने का निर्णय लिया है। जिस तरह विपक्ष लामबंद हो रहा है उसको देखते हुए राजग भी अपना कुनबा बढ़ाने पर काम कर रहा है। खासकर दक्षिण के राज्यों पर भाजपा का विशेष फोकस है, क्योंकि कर्नाटक की हार के बाद पूरा दक्षिण भारत भाजपा के हाथ से निकल गया है। भाजपा हाई कमान ने कर्नाटक में जनता दल (एस) के साथ गठबंधन के लिए प्रक्रिया शुरू की है। जनता दल (एस) भी भाजपा से हाथ मिलाने को तैयार है, लेकिन भाजपा की राज्य इकाई इसका विरोध कर रही है।
उनका कहना है कि पार्टी जनता दल (एस) के बिना भी पिछला प्रदर्शन दोहराने में कामयाब रहेगी। लोकसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ एवं तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पार्टी ने इसी महीने राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं कर्नाटक में संगठन को नया चेहरा देने तथा सभी विवादित मुद्दों को सुलझाने का निर्णय लिया है।
तेलंगना और आंध्र प्रदेश में तेलगुदेशम पार्टी (टीडीपी) के साथ गठबंधन करने की पहल हो रही है। लेकिन भाजपा को डर है कि टीडीपी के साथ गठबंधन होने से वाईएसआर कांग्रेस विपक्षी खेमे की ओर जा सकती है। अभी तक वाईएसआर कांग्रेस भाजपा के साथ खड़ी है। दक्षिण भारत में भाजपा की रणनीति में आया बड़ा बदलाव विपक्षी चुनौतियों को लेकर है। भाजपा ने तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक सहित कुछ अन्य दलों और केरल में छोटे दलों को लेकर लोकसभा चुनाव लडऩे का संकेत दिया है। मध्यप्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में वर्तमान अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। पार्टी उनकी जगह नए चेहरे को देने की तैयारी में है। राजस्थान में भी भाजपा को अपनी पार्टी के भीतर से ही चुनौती मिल रही है। पार्टी इस बार पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को नाराज नहीं करना चाहती है। ऐसी स्थिति में पार्टी वसुंधरा को अपना चेहरा बना सकती है।
संगठन महासचिव बीएल संतोष की वसुंधरा से मुलाकात के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, चिराग पासवान की लोजपा, उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी को राजग में लाने की बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। शिरोमणि अकाली दल को राजग में लाने के लिए बातचीत की प्रक्रिया जारी है। कर्नाटक चुनाव में हार के बाद भाजपा ने विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री की जगह स्थानीय नेताओं को चेहरा बनाने का निर्णय लिया है। अगले कुछ दिनों में केंद्रीय स्तर पर कुछ बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। भाजपा अगला लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव नई रणनीति के साथ लडऩे की तैयारी में है।