पिछले कुछ वर्षों से भारत और अमरीका के बीच रक्षा सहयोग में बढ़ोत्तरी हुई है। ङ्क्षहद प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता एवं एलएसी पर चीन की घुसपैठ को देखते हुए भारत और अमरीका दोनों देशों को एक साथ आने पर मजबूर होना पड़ा है। अमरीका भारत को रूस से दूर करने के लिए रक्षा के क्षेत्र में भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की लगातार कोशिश में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 जून को अमरीका की यात्रा पर जाने वाले हैं। उस दौरान दोनों देशों के बीच वैश्विक एवं द्विपक्षीय विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी, जिसमें रक्षा सहयोग पर विशेष रूप से फोकस रहेगा। इसी यात्रा की तैयारी के सिलसिले में अमरीका के रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे थे। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान अपने समकक्ष रक्षामंत्री राजनाथ ङ्क्षसह के साथ विस्तार से चर्चा की। अमरीका भारत के साथ हथियारों एवं उपकरणों को साथ मिलकर विकसित करने के लिए औद्योगिक सहयोग के क्षेत्र में आगे बढऩा चाहता है। पारस्परिक रक्षा समझौते पर भी दोनों नेताओं के बीच विस्तार से चर्चा हुई। अमरीका भारत के साथ लड़ाकू विमानों के जेट इंजनों के निर्माण के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी साझा करने को तैयार है।
भारत अमरीका से 30 एमक्यू-9बी सशस्त्र ड्रोन खरीदना चाहता है। अमरीकी रक्षामंत्री के साथ इस विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। 3 अरब डॉलर के इस समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमरीका दौरे के दौरान मुहर लग सकती है। अमरीका का कहना है कि वह भारत के साथ विभिन्न रक्षा परियोजनाओं के लिए उच्च प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण कर सकता है क्योंकि उसका भारत पर भरोसा है। रक्षा स्टार्ट अप पारिस्थितिक यंत्र के बीच बढ़ते सहयोग को सुविधाजनक बनाने सहित विभिन्न योजनाओं के लिए रोडमेप बनाने पर चर्चा हुई। दोनों देश यूएस-इंडिया डिफेंस इंडस्ट्रीयल कॉरपोरेशन (इंडस-एक्स) पर आगे बढऩे पर भी सहमति बनी। इस योजना के तहत लंबी दूरी के तोपखाने, जेट इंजनों एवं पैदल सेना के वाहनों के विकास एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर भी चर्चा हुई। भारत रक्षा पोर्ट फोलियो में विभिन्नता लाने के क्षेत्र में काम कर रहा है।
वर्ष 2017 में भारत रूस से 62 प्रतिशत हथियारों एवं अन्य उपकरणों का आयात करता था जो 2022 में घटकर 45 प्रतिशत रह गया है। भारत अब अमरीका और फ्रांस जैसे देशों के साथ रक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर रूस पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। मेक इन इंडिया के तहत भारत अपने देश में ही हथियारों एवं रक्षा उपकरणों का निर्माण करना चाहता है। मेक इन इंडिया पहल के तहत वर्ष 2023 में भारत ने दुनिया के देशों को 1.95 बिलियन डॉलर के हथियारों एवं रक्षा उपकरणों का निर्यात किया। इसमें हेलीकॉप्टर, नौसैनिक वाहन, विमान, मिसाइल एवं बख्तरबंद वाहन शामिल हैं। वर्ष 2025 तक भारत 5 बिलियन डॉलर के हथियारों एवं रक्षा उपकरणों के निर्यात का लक्ष्य रखा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक लेते हुए भारत ने हथियारों, रक्षा उपकरणों, मिसाइलों एवं दूसरे क्षेत्रों में निर्भर होने के लिए विदेशी कंपनियों के साथ समझौता कर भारत में ही प्लांट लगाने की पहल शुरू की है, जिसके सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान जिस तरह यूक्रेन को हथियारों के लिए पश्चिमी देशों की ओर देखना पड़ा है, उससे भारत ने सबक लिया है। पिछले तीन वर्षों से चीन के साथ भारत का तनाव चल रहा है।
एलएसी पर युद्ध जैसा माहौल है। यही कारण है कि भारत नए-नए हथियारों को विकसित कर लगातार अपनी सामरिक तैयारी को मजबूत कर रहा है। रूस इस मामले में तटस्थ रूख अपनाए हुए हैं। ऐसी स्थिति में भारत अपनी तैयारी के साथ-साथ अमरीका एवं पश्चिमी देशों के साथ संंबंध मजबूत कर रहा है ताकि जरूरत पडऩे पर मदद मिल सके। चीन की आक्रामकात एवं विस्तारवादी नीति को रोकने के लिए अमरीका एवं जापान के साथ मिलकर क्वाड की स्थापना की है। इसके अलावा भारत चीन के पड़ोसी देशों के साथ मिलकर उस क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ा रहा है। चीन से निबटने की दिशा में अमरीका भारत की मदद कर रहा है। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री की अमरीकी यात्रा के दौरान चीन पर अंकुश लगाने की दिशा में कारगर नीति बनेगी। अमरीकी रक्षामंत्री की भारत यात्रा दोनों देशों की रक्षा सहयोग की दिशा में मिल का पत्थर साबित होगा।