ज्येष्ठ माह में आने वाली पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह दिन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन स्नान-दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चंद्र देव के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत 3 जून को रखा जाएगा। इस दिन कुछ चीजों का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा : हिंदी पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 03 जून को सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर प्रारंभ होगी और 04 जून की सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत के दिन चंद्र देव की उपासना का बड़ा महत्व है। इसलिए ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 03 जून 2023, शनिवार को रखा जाएगा।
चंद्रामा से जुड़ी चीजों का करें दान : आपको बता दें ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद चंद्रमा से जुड़ी चीजों का दान करने से जीवन खुशियों से भर जाता है। इस दिन आप सफेद वस्त्र, शक्कर, चावल, दही, चांदी, सफेद फूल, मोती आदि का दान करें. ऐसा करने से कुंडली में चंद्रमा का स्थिति मजबूत होती है।
आज यानी ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी माता पर 11 कौड़ियां चढ़ाने और हल्दी से उनका तिलक करने से मां की कृपा बरसती है। अगले दिन इन कौड़ियों को एक लाल कपड़े में बांधकर धन की तिजोरी में रखने से घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।
अन्न और जल दान पहुंचाएगा लाभ : ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन अन्न और जल दान बहुत फायदा पहुंचा सकता है। पूर्णिमा पर तीर्थ स्नान और जल की पूजा का भी विशेष महत्व होता है।
शुभ योग : रवि योग- सुबह 05 बजकर 23 मिनट से 06 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
शिव योग : सुबह से लेकर दोपहर 02 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
सिद्ध योग-दोपहर 02 बजकर 48 मिनट से देर रात तक।