मई के प्रथम सप्ताह से मणिपुर में शुरू हुई ङ्क्षहसा थमने का नाम नहीं ले रही है। हाईकोर्ट द्वारा मैतेई समुदाय को एसटी का दर्जा देने के निर्देश के बाद मणिपुर में उग्र प्रदर्शन के दौरान ङ्क्षहसा की कई घटनाएं हुईं। सरकार की पहल के बाद इसमें कमी आई। लेकिन कुछ सप्ताह के बाद मणिपुर में फिर से ङ्क्षहसा की घटनाओं में वृद्धि हुई है। अब तक इस तरह की घटनाओं में 80 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। कुकी और नगा संगठन के लोग इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनको ऐसा लगता है कि उनके अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। मणिपुर में 53 प्रतिशत मैतेई समुदाय की आबादी है जो मुख्य रूप से इंफाल की घाटी क्षेत्र में रहते हैं। नगा और कुकी की आबादी 40 प्रतिशत है जो पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

आंदोलन मुख्य रूप से कुकी-नगा संगठनों द्वारा चलाया जा रहा है।  ऐसी खबर है कि मणिपुर के आतंकी संगठन भी इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि मणिपुर में हुई ङ्क्षहसात्मक घटनाओं के पीछे मणिपुर के आतंकी संगठनों का हाथ है। राज्य की सीमावर्ती जिले में ही ङ्क्षहसा की ज्यादा घटनाएं हुई हैं। फिलहाल मणिपुर में सेना और असम रायफल्स के 10 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं। इसमें अद्र्धसैनिक बलों की संख्या को शामिल नहीं किया गया है। मणिपुर की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 29 मई से मणिपुर के दौरे पर हैं। उन्होंने सबसे पहले मुख्यमंत्री एन बीरेन ङ्क्षसह, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, मणिपुर मंत्रिमंडल के सदस्यों, केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला एवं खुफिया विभाग के निदेशक तपन कुमार डेका के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आंदोलनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है। ङ्क्षहसा में जान गंवाने वाले प्रत्येक परिवार को दस लाख रुपए का मुआवजा एवं सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा की गई है।

केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने में लगी हुई है कि इस आंदोलन के दौरान मणिपुर में पेट्रोल, एलपीजी, चावल तथा दूसरे खाद्य सामग्रियों की किल्लत नहीं हो इस बारे में राज्य  प्रशासन के साथ विस्तार से बातचीत की गई है। सीमावर्ती राज्य होने के कारण मणिपुर में अस्थिरता गंभीर ङ्क्षचता का विषय है। यही कारण है कि केंद्र ने इसे गंभीरता से लिया है। ऐसा संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि मणिपुर में ङ्क्षहसात्मक घटनाओं के पीछे राष्ट्र विरोधी तत्वों का हाथ हो सकता है। सेना प्रमुख मनोज पांडे भी मणिपुर का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर चल रहे ऑपरेशन का जायजा लिया। सबसे ङ्क्षचता की बात यह है कि कुछ आतंकी संगठनों ने सेना के हथियारों को लूट लिया है।

उसी हथियार का इस्तेमाल वे इस आंदोलन के लिए कर रहे हैं। सेना ने इन हथियारों की रिकवरी के लिए एक सीक्रेट मिशन शुरू किया है। इस दौरान कई आतंकियों को मौत के घाट भी उतारा गया है। सीडीएस अनिल चौहान भी मणिपुर का दौरा कर चुके हैं। कुल मिलाकर केंद्र मणिपुर की स्थिति के बारे में अलर्ट मोड पर है। केंद्र की गंभीरता का इससे पता चलता है कि गृहमंत्री शाह 29 मई से ही मणिपुर में डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने वहां के महिला संगठनों एवं महिला उद्यमियों के साथ शांति बहाली के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया है। मणिपुर के सिविल सोसाइटी संगठनों के साथ भी बैठक हुई है। मणिपुर के चुराचांदपुर जहां बड़ी घटना हुई थी, वहां जाकर शाह ने वहां के सिविल सोसाइटी संगठनों के साथ बातचीत की है।

इसके अलावा मणिपुर के राजनीतिक दलों के साथ भी उनकी बैठक हुई है, जिसमें उन्होंने स्थिति को सामान्य बनाने के लिए सभी से सहयोग की अपील है। सभी चाहते हैं कि मणिपुर में शांति बहाली हो। इसके लिए आंदोलनकारी संगठनों की मांगों पर विचार कर उसका उचित समाधान किया जाए। अगर इस मामले में राष्ट्र विरोधी तत्व शामिल हैं तो उनपर कठोर कार्रवाई की जाए।