दूध को संपूर्ण आहार माना गया है। नवजात शिशु से लेकर बढ़ते बच्चों के लिए दूध बेहद जरूरी होता है। वहीं यंग और एडल्ट लोगों को भी दूध पीने की सलाह दी जाती है। कैल्शियम और मिनरल्स से भरपूर दूध बॉडी को सारे जरूरी पोषण देने में मदद करता है। साथ ही दांत और हड्डियों को मजबूत भी बनाता है।

इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट बच्चों को ही नहीं बल्कि हर उम्र के लोगों को डाइट में दूध लेने की सलाह देते हैं। लेकिन जरूरी नहीं कि हर बॉडी को दूध फायदा ही करे। कुछ बीमारियों में दूध पीना समस्या को बढ़ा सकता है। इस बारे में डायटीशियन का कहना है कि कुछ बीमारियों में दूध पीने से शरीर की परेशानी बढ़ जाती है। इसलिए इस तरह की बीमारियों में दूध से दूर ही रहने में भलाई है।

इंफ्लेमेशन की समस्या : अगर किसी के शरीर में सूजन से जुड़ी बीमारी है तो उसे दूध पीने से बचना चाहिए। दूध में मौजूद सैचुरेटेड फैट बॉडी में इंफ्लेमेशन को बढ़ा देता है। 

लीवर की समस्या में दूध से रहें दूर:

किसी को अगर लीवर से जुड़ी समस्या जैसे फैटी लीवर या लीवर में सूजन की समस्या हो तो उसे दूध से दूर रहना चाहिए। लीवर की गड़बड़ी होने पर लीवर दूध को ठीक से पचा नहीं पाता। जिसकी वजह से लीवर में सूजन की समस्या बढ़ जाती है। 

पीसीओएस : जिन महिलाओं को लेट पीरियड आने और पीसीओएस की समस्या रहती है। उन्हें दूध पीने से बचना चाहिए। दूध पीने से बॉडी में एंड्रोजन और इंसुलिन का लेवल बढ़ता है। जिससे पीसीओएस की समस्या से पीडि़त महिलाओं में हार्मोनल इंबैलेंस को बढ़ावा मिलता है। हार्मोनल इंबैलेंस में दूध नहीं पीना चाहिए।

डाइजेस्टिव सिस्टम खराब : कब्ज, गैस, ब्लॉटिंग जैसी समस्या अक्सर परेशान करती है तो दूध कतई ना पिएं। कमजोर डाइजेशन होने पर दूध परेशानियों को और बढ़ा देता है। अगर दस्त की समस्या हो रही है तो भी दूध से दूर रहें।

दूध से एलर्जी : कुछ लोगों को दूध से एलर्जी होती है। दूध पीते ही उनके शरीर में प्रतिक्रिया होने लगती है। जिसे लैक्टोज इंटॉलरेंस कहते हैं। इसमे दूध में मौजूद लैक्टोज को पचाने में दिक्कत होती है और ब्लॉटिंग, सूजन, गैस जैसी समस्या होने लगती है।