ब्रिटेन रूस के हीरों पर प्रतिबंध लगाएगा,वहीं अमरीका उन कंपनियों पर सख्ती करेगा जो प्रतिबंधों को कमजोर करने में रूस की मदद कर रही हैं, इसको लेकर जापान के शहर हिरोशिमा में जी-7 देशों के शीर्ष नेताओं की बैठक में एक साझा बयान भी जारी किया गया। जी-7 ने अपने साझा बयान में यह भी कहा कि हम अपने उन कदमों में भी सफलता पा रहे हैं जिनके तहत तय किया जा रहा है कि रूस हमारे और दुनिया के खिलाफ ऊर्जा की उपलब्धता को हथियार न बना सके। कनाडा, जापान, फ्रांस, अमरीका, इटली, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के समूह जी-7 के मुताबिक यूक्रेन में शांति तब तक हासिल नहीं की जा सकती, जब तक रूसी सेना और सैन्य साजो सामान वहां से पूरी तरह और बिना किसी शर्त के हट नहीं जाते। सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋ षि सुनक ने ऐलान किया कि उनका देश, रूस से हीरे, तांबे, अल्युमीनियम और निकेल जैसी धातुओं का आयात बैन कर रहा है।
रूस हर साल अरबों डॉलर का हीरे बेचता है। ब्रिटेन उन 86 लोगों और कंपनियों पर भी कार्रवाई करेगा,जो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मिलिट्री-इंडस्टि्रयल कॉम्प्लैक्स से जुड़े हैं। सुनक सरकार के मुताबिक अब ऊर्जा, धातु और शिपिंग उद्योग पर सख्ती की जाएगी। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल ने भी ईयू में रूसी हीरों के कारोबार पर लगाम कसने की जानकारी दी। कई मीडिया संस्थानों ने एक शीर्ष अमरीकी अधिकारी के हवाले से रूस पर लगाए जा रहे नए अमरीकी प्रतिबंधों की जानकारी दी। अमरीकी अधिकारी के मुताबिक जी-7 के सभी सदस्य नए प्रतिबंधों और एक्सपोर्ट कंट्रोल को लागू करने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अमरीका प्रतिबंधों का अपना एक पैकेज भी लागू करेगा। अमरीकी प्रतिबंधों के जरिए रूस और अन्य देशों की करीब 70 कंपनियों को अमरीका में निर्यात करने से रोका जाएगा। वॉशिंगटन लोगों, कंपनियों, जहाजों और विमानों पर भी बैन लगाएगा। ये वित्तीय सेवा मुहैया कराने वालों के साथ ही युद्ध में रूस और उसकी मदद करने वालों की भविष्य की ऊर्जा और क्षमता को निशाना बनाएंगे।
हालांकि जर्मन चांसलर ओलाफ शॉल्त्स जल्दबाजी में रूस पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने का समर्थन नहीं कर रहे हैं। शॉल्त्स चाहते हैं कि मॉस्को के खिलाफ ऐसे कदम उठाए जाएं, जो तार्किक हों और अमल में लाए जा सकें। रुस ने चीन, भारत और यूएई को खूब कच्च्चा तेल बेच रहा है। रूस, चीन, भारत और यूएई को खूब कच्चा तेल बेच रहा है रूस के पास कच्चे तेल, गैस, हीरों और कई जरूरी धातुओं का बड़ा भंडार है, इसके कारण पश्चिमी प्रतिबंध रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने में बहुत हद तक नाकाम साबित हो रहे हैं। आर्थिक प्रतिबंधों की मार से बचने के लिए रूस, दुनिया की दो ताकतवर अर्थव्यवस्थाओं चीन और भारत को खूब तेल बेच रहा है। ईंधन की इस सप्लाई से कई देशों की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं और रूस को पैसा भी मिल रहा है। जी-7 देशों ने मिलकर पिछले साल रूसी तेल और डीजल के लिए 60 डॉलर प्रति बैरल की सीमा तय की थी।
लेकिन इसका भी बहुत ज्यादा असर होता नहीं दिख रहा है। उल्लेखनीय है कि जी-7 कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमरीका का एक समूह है। यह संगठन दुनिया की सात सबसे बड़ी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ है, जिसकी वैश्विक स्तर पर शुद्ध सम्पत्ति (280 ट्रिलियन) है, जो 62 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करते है। जी-7 देश नाममात्र मूल्यों के आधार पर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 46 प्रतिशत से अधिक और क्रय-शक्ति समता के आधार पर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 32 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही जी7 शिखर सम्मेलन में यूरोपीय संघ भी प्रतिनिधित्व करता है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जी7 ने रसिया को लेकर जो फैसले लिए हैं, वे उसके लिए परेशानी का सबब बनेंगे, इसमें कोई दो राय नहीं है।