भोपाल : पर्यावरण कार्यकर्ता अल्फरान उद्दीन ने हाल ही में हुए अपने निकाह में न तो डिस्पोजल का उपयोग किया और न ही कार्ड छपवाए। इसके अलावा सभी रिश्तेदारों को कार्ड व्हाट्सएप के माध्यम से ही भेजे। इतना ही नहीं, जूठे खाने को खुले में फेंकने की अनुमति नहीं थी। इसे नियमपूर्वक खाद बनाने के लिए उपयोग में लिया गया। इसके अलावा निकाह में पधारे मेहमानों को रिटर्न गिफ्ट के तौर पर पौधे बांटे गए। खास बात यह है कि मुस्लिम समुदाय में यह पहला पर्यावरण के अनुकूल निकाह था।
निकाह में पहुंचे अल्फरान के रिश्तेदार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कहा कि वे भी अपने बच्चों का निकाह इसी तरह से करेंगे। इसमें खर्चा भी कम है और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी यह अच्छी पहल है। अल्फरान ने बताया कि वे कक्षा सातवीं से एकलव्य नाम की संस्था के साथ जुड़कर पौधारोपण और कपड़े के थैले बनाने का काम करते थे। इस पहल से वे इतने प्रभावित हुए कि आजीवन पर्यावरण संरक्षण का काम करने की ठान ली। वे वर्तमान में दुर्गा नगर में बच्चों को पढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाने का काम कर रहे हैं। इसी दौरान जब उनका निकाह पक्का हो गया, तो उन्होंने ठान लिया कि वे पूरा प्रयास करेंगे कि निकाह में कम से कम पानी का उपयोग करेंगे और हानिकारक प्लास्टिक और थर्माकोल के डिस्पोजल पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे।
अल्फरान ने बताया कि पर्यावरण अनुकूल निकाह के लिए सबसे पहले उन्होंने परिवार को कार्ड न छपवाने के लिए मना लिया। सभी रिश्तेदारों को व्हाट्सएप से निमंत्रण भेजे गए। रिश्तेदारों को मनाने में परेशानी आई, लेकिन सब मान गए। सजावट के लिए पत्तों का उपयोग किया गया। डिस्पोजल कटोरी की जगह पत्तों के कटोरे और चाय के लिए कुल्हड़ और नगर निगम के बर्तन बैंक से बर्तन लिए गए।