समाचार पत्र राष्ट्रीय चेतना का ध्वज वाहक होता है। राष्ट्रीय चेतना का अर्थ सांस्कृृतिक, सामाजिक, भाषाई एवं राष्ट्रीय एकता को समृद्ध करने की चेतना है। वर्तमान परिस्थिति में सकारात्मक संवाद पर जोर देने की जरूरत है। पूर्वोत्तर का अग्रणी हिन्दी समाचार पत्र पूर्वांचल प्रहरी पिछले 34 वर्षों से सत्य के मार्ग पर चलते हुए सकारात्मक संवाद के माध्यम से सामाजिक बुराइयों को उजागर करने, राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का काम दृढ़ संकल्प के साथ कर रहा है। आंचलिक पत्रकारिता हिन्दी पत्रकारिता का मेरुदंड है। पूर्वांचल प्रहरी पूर्वोत्तर के हिन्दीभाषी समाज की समस्याओं को उजागर करने के साथ-साथ हिन्दी के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका का निर्वाह कर रहा है। आज के समय में पेड न्यूज, मीडिया ट्रायल एवं गैर मुद्दों को विशेष तरजीह मिल रही है, जबकि वास्तविक मुद्दों को दरकिनार किया जा रहा है। वास्तविक एवं समाज हित के समाचारों को नजरअंदाज किया जा रहा है। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। ऐसी स्थिति में मीडिया पर समाज को दिशा देने की ज्यादा जिम्मेवारी है। मीडिया आज विश्वसनीयता एवं साख के संकट से गुजर रहा है। उसका जवाब पत्रकारों को ही अपनी कलम से देना होगा। मीडिया अन्य क्षेत्रों की तरह एक पेशा है किंतु उसमें दूसरे पेशों की तरह केवल लाभ-हानि का खेल नहीं, बल्कि सामाजिक, राज्यिक एवं राष्ट्रीय जिम्मेवारी भी है। लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ होने के नाते राष्ट्र को मीडिया से काफी अपेक्षा रहती है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और सभ्य तरीके से तथा मर्यादित भाषा में जनहित के मामलों को अपनी कलम के माध्यम से उठाना है। पूर्वांचल प्रहरी अपने इन दायित्वों का पालन करते हुए पूर्वोत्तर के राज्यों तथा जनता के बीच सेतु का काम कर रहा है। बदलते परिवेश में मीडिया की भूमिका तथा रिपोॄटग का तरीका भी बदल चुका है। ऐसे में पत्रकारिता से संबंधित आचार-संहिता का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, क्योंकि पीत पत्रकारिता से समाज एवं देश का नुकसान हो रहा है। अपने जन्म-लग्न से ही पूर्वांचल प्रहरी पूर्वोत्तर के हिन्दीभाषियों की आवाज बनने के साथ-साथ प्रहरी की भूमिका का निर्वाह कर रहा है।
जिस वक्त पूर्वांचल प्रहरी का प्रकाशन हुआ था, उस वक्त असम आतंक की ज्वाला में झुलस रहा था। चारों तरफ भय एवं अविश्वास का माहौल था। तमाम धमकियों एवं चुनौतियों की परवाह किए बिना स्वर्गीय जी.एल. अग्रवाला ने 16 मई 1989 में पूर्वांचल प्रहरी का प्रकाशन शुरू किया। संकट के समय जी.एल. अग्रवाला ने ढाल की तरह हिन्दीभाषियों के साथ खड़े होकर उनका मनोबल बढ़ाया। आज पूर्वांचल प्रहरी की वर्षगांठ पर पूर्वांचल प्रहरी परिवार उनको याद करता है एवं श्रद्धा सुमन अर्पित करता है। पूर्वांचल प्रहरी आगे भी उनके बताए रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा। पूर्वोत्तर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में स्व. जी.एल. अग्रवाला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्वांचल प्रहरी के प्रकाशन के बाद पूर्वोत्तर के हिन्दी लेखकों, कवियों, साहित्यकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिल गया। यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि बड़ी संख्या में असमियाभाषी पाठक भी इस अखबार से जुड़े हुए हैं। हमलोगों ने असमिया भाषा के कई शब्दों का हिन्दी में प्रयोग करना शुरू कर दिया है। हमारी कोशिश है कि हिन्दी तथा असमिया भाषा के बीच तालमेल बढ़े। उसी का परिणाम है कि आज बड़ी संख्या में हिन्दी रचनाओं का अनुवाद असमिया में तथा असमिया रचनाओं का अनुवाद हिन्दी में हो रहा है।
कोरोना काल के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में भी चुनौती बढ़ी है। कोरोना के वक्त प्रिंट मीडिया पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा। उस वक्त अनेक पाठकों ने अखबार पढ़ना बंद कर दिया, जिसमें से कुछ वापस नहीं लौटे। कुछ पाठक ऑनलाइन की तरफ मुड़ गए। ऑनलाइन की तरफ से मिल रही चुनौती को देखते हुए प्रिंट मीडिया एवं हिन्दी पत्रकारिता को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना होगा। पत्रकारिता को बाजारवाद के शिकंजे से बाहर आकर जनहित के मामले को उठाना होगा। पत्रकारिता केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि एक अनुष्ठान है, जिसे पक्ष-विपक्ष को छोड़कर सिर्फ जनपक्ष पर ध्यान केंद्रित करना होगा। पत्रकारों को लोक मान्यता अर्जित करने तथा उसे बरकरार रखने पर फोकस करना चाहिए। हम पाठकों को आश्वासन देना चाहते हैं कि पूर्वांचल प्रहरी अपनी लक्ष्मण रेखा में रहते हुए जनहित के मामले को उठाता रहा है तथा आगे भी कलम के सिपाही की भूमिका का निर्वाह करता रहेगा। पूर्वांचल प्रहरी की 34वां वर्षगांठ पर सभी पाठकों, विज्ञापनदाताओं, एजेंटों, हॉकरों तथा शुभचिंतकों को हार्दिक बधाई। आपके सहयोग से ही पूर्वांचल प्रहरी आज इस मुकाम पर पहुंचा है। उम्मीद है कि भविष्य में भी आप सबका हमें सहयोग और प्रेम मिलता रहेगा।