224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को मतदान हो चुका है। इस बार 73 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ है। कर्नाटक विधानसभा का चुनाव सत्ताधारी भाजपा तथा कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। भाजपा यह चुनाव जीतकर वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है। कर्नाटक दक्षिण भारत में भाजपा का गढ़ रहा है। यही से भाजपा दक्षिण भारत के दूसरे राज्यों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। इस बार के चुनाव में कर्नाटक में सरकार के प्रति लोगों की नाराजगी भी देखी गई है। दूसरी तरफ कांग्रेस कर्नाटक में जीत दर्ज कर अपने अस्तित्व की रक्षा करना चाहती है।
कांग्रेस बोम्मई सरकार से लोगों की नाराजगी का फायदा उठाना चाहती है। कर्नाटक में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता भी हैं, जो कई सीटों पर नतीजों को प्रभावित करेंगे। कर्नाटक में जेडीएस की भी अपनी साख है। देखना है कि अल्पसंख्यक मतदाता कांग्रेस और जेडीएस के बीच विभाजित होते हैं या एकतरफा कांग्रेस के समर्थन में मतदान करते हैं। राजनीतिक पाॢटयों ने इस बार मतदाताओं को लुभाने के लिए कर्नाटक में उपहारों की झड़ीं लगा दी है। इसको पूरा करने के लिए काफी धन की जरूरत होगी। सरकार के गठन के बाद ही पता चलेगा कि राजनीतिक पाॢटयां अपने वादों को किस तरह पूरा कर पाएंगी। मतदान के बाद हुए विभिन्न एग्जिट पोलों में अब तक कांग्रेस का पलड़ा भारी दिख रहा है। सात महत्वपूर्ण एग्जिट पोलों में से पांच ने कांग्रेस को भाजपा पर बढ़त दिखाया है, जबकि दो एग्जिट पोलों में भाजपा का पलड़ा भारी दिखाया गया है।
मध्य कर्नाटक तथा बेंगलुरु में कांग्रेस की बढ़त दिखाई जा रही है जबकि करावल तटीय इलाके में भाजपा की बढ़त है। अगर एग्जिट पोल का आकलन सही रहा तो इस बार कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। मतगणना 13 मई को होगी। उसी दिन यह स्पष्ट हो पाएगा कि कर्नाटक में किसके सर पर ताज सजेगा। उस दिन यह भी पता चलेगा कि किसका एग्जिट पोल कितना सटिक है। इसको लेकर भी अभी से ही सियासत शुरू हो गई है। जहां कांग्रेस के नेता एग्जिट पोल के आंकड़े को आधार बनाकर भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने तो बेहतर प्रदर्शन के लिए कर्नाटक की जनता और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को धन्यवाद भी दे दिया है। दूसरी तरफ कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई तथा भाजपा के कई नेताओं का दावा है कि इस बार भी भाजपा बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।
भाजपा नेताओं का कहना है कि एग्जिट पोल का आकलन सही नहीं है। वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद आठ एग्जिट पोलों में से सात ने त्रिशंकु विधासभा की भविष्यवाणी की थी, ङ्क्षकतु परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा की सरकार बन गई। इस बार भी ऐसा होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार कर्नाटक के अल्पसंख्यक मतदाता जनता दल (एस) को छोड़कर कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया है। अल्पसंख्यक मतदाताओं का मानना है कि अगर भाजपा को हराना है तो कांग्रेस को वोट देना होगा। इस बार के चुनाव प्रचार के दौरान धाॢमक आधार पर मतदाताओं को लुभाने का पूरा प्रयास किया गया है।
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल और पीएफआई को एक समान बता दिया, जिसके बाद बवाल मच गया। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा कि अगर उसकी सरकार बनेगी तो कर्नाटक में पीएफआई की तरह बजरंग दल को भी प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर भाजपा ने बवाल मचाना शुरू कर दिया। भाजपा ने बजरंग दल को बजरंगी बली से जोड़कर इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर दिया। भाजपा ने राम और बजरंगबली को उत्तर प्रदेश से कर्नाटक को जोड़कर एक नया मुद्दा बना दिया। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान बजरंगबली का मुद्दा जोड़-शोर से उठाया तथा कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करने का पूरा प्रयास किया। कर्नाटक विधानसभा चुनाव का परिणाम राष्ट्रीय राजनीति को निश्चित रूप से प्रभावित करेगी। अगर भाजपा के हाथ से कर्नाटक निकला तो उसके लिए एक बड़ा धक्का होगा। अब देखना है कि चुनाव परिणाम किस ओर करवट लेता है।