क्या पृथ्वी के बाहर भी जीवन है? बीते कई दशकों से वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश में जुटे हुए हैं। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (हृ्रस््र) लगातार इस बारे में रिसर्च कर रहा है। इसी कड़ी में अब नासा पृथ्वी से दूर जीवन की मौजूदगी को तलाशने के लिए एक सांप जैसा रोबोट विकसित कर रहा है। उनका कहना है कि यह रोबोट विभिन्न इलाकों में अपनी विविध अनुकूलन क्षमता के माध्यम से अंतरिक्ष अन्वेषण को बढ़ावा दे सकता है। इस रोबोट को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जिसका खास फोकस शनि के छठे सबसे बड़े चंद्रमा ‘एन्सेलेडस’ पर है। एन्सेलेडस शनि के 83 चंद्रमाओं में से एक है। यह 1789 में खोजा गया एक छोटा बर्फीला पिंड है, जिसे वैज्ञानिक रूप से सौर मंडल के सबसे दिलचस्प स्थलों में से एक माना गया है।

एन्सेलेडस अपने वैश्विक महासागर और आंतरिक गर्मी के कारण नासा के लिए जीवन की खोज में एक आशाजनक पिंड बन गया है। इस खास रोबोट को ईईएलएस यानी ‘एक्सोबायोलॉजी एक्सटेंट लाइफ सर्वेयर’ नाम दिया गया है, जो एन्सेलेडस की बर्फीली सतह पर पानी और जीवन के लिए अन्य जरूरी तत्वों के साक्ष्य की तलाश करने में मदद करेगा। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के मुताबिक, ‘ईईएलएस सिस्टम असल में एक मोबाइल इंस्ट्रूमेंट प्लेटफॉर्म है, जो आंतरिक इलाकों की संरचनाओं का पता लगाने और जीवन के साक्ष्यों का पता लगाने में मदद करेगा। इसे खासतौर पर समुद्री दुनिया, भूलभुलैया जैसे कठिन वातावरण और तरल पदार्थों के अनुकूल डिजाइन किया गया है।

एन्सेलेडस की बर्फीली सतह अपेक्षाकृत काफी चिकनी बताई जा है, जहां तापमान माइनस 300 डिग्री फारेनहाइट से भी अधिक रहता है। आशंका जताई जा रही है कि बर्फीली सतह के नीचे भारी मात्रा में पानी मौजूद हो सकता है। कैसिनी अंतरिक्ष यान द्वारा मिले आंकड़ों की मानें तो सतह से निकलने वाले प्लम (एक प्रकार का धुंआ) सीधे पानी में जाते हैं, जिसकी वजह से यह संभावित रूप से रहने योग्य तरल महासागर जैसा बन जाता है। अभी तक नासा ने ईईएलएस प्रोजेक्ट लॉन्च के लिए कोई निश्चित तारीख निर्धारित नहीं की है। इससे जुड़े किसी भी मिशन के शुरू होने में अभी काफी समय लग सकता है। अगर 16 फुट लंबा यह सांप जैसा रोबोट सफल होता है, तो इससे अन्य आकाशीय ग्रहों और संरचनाओं के गहन खोज का द्वार खुल सकता है, जहां अब तक पहुंचना बेहद मुश्किल था।