इंसान चांद पर बहुत बार जा चुका है। कई देशों के अंतरिक्ष यान चांद पर उतर चुके हैं। कुछ के रोवर वहां घूम रहे हैं, लेकिन फिर भी अभी हम चांद की बहुत सी बातों से अनजान हैं। इनमें से एक रहस्य है उसकी असमानता। लेकिन हाल में नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित एक शोधपत्र ने इस असमानता की सप्रमाण व्याख्या दी है।
दो हिस्सों की असमानताः जब से चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह बना है , तभी से पृथ्वी से चांद का एक ही हिस्सा दिखाई देता है। इस हम पास का हिस्सा कहते हैं। लेकिन पृथ्वी की ओर यह हिस्सा उसके पिछले हिस्से से बहुत अलग है।
कब पता चला अंतरः पास के हिस्से में जहां कुछ काले हिस्से हैं जिन्हें लूनार मारिया कहा जाता है जो चांद पर दाग की तरह माने जाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये क्रेटर्स या फिर ज्वालामुखी के हिस्से हो सकते हैं। पहले वैज्ञानिकों का मानना था का चांद का पिछला हिस्सा भी कुछ आगे के हिस्से की ही तरह होगा। लेकिन जब सोवियत संघ के अंतरिक्ष यान ने 1950 के दशक के अंत और 1960 के दशक के शुरू में चांद के पिछले हिस्से की तस्वीरें लीं, तो उनसे पता चला कि उस हिस्से में तो मारिया जैसा कुछ नहीं है।
क्या पता चलाः वैज्ञानिकों क पता चला कि चांद के पिछले हिस्से में मारिया जैसा भूभाग केवल एक प्रतिशत है जबकि सामने के हिस्से में करीब 31 प्रतिशत है। वैज्ञानिकों को लगा कि चांद के दोनों हिस्सों में इतना बड़ा फर्क यह जानने में मदद कर सकता है कि चांद का निर्माण कैसे हुआ।
कई सुरागों का निचोड़ः टोक्यो इंस्टीट्यूट में अर्थ लाइफ साइंस इंस्टीट्यूट, फ्लोरीडा यूनिवर्सिटी, टोसन यूनिवर्सिटी के कार्नेगी इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, नासा जॉनसन स्पेस सेंटर और न्यू मैक्सिको यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अवलोकन के आंकड़ो, लैबोरेटरी के प्रयोगों और कम्प्यूटर सिम्यूलेशन से मिलाकर इस बात के सुराग हासिल किए है कि चांद के आगे पीछे कि हिस्सों में इतना फर्क कैसे आ गया।
अब भी काफी कुछ पता करना बाकीः वैज्ञानिकों के लिए अभी यह पता करना बाकी है कि पृथ्वी के पास वाले हिस्से में इतनी ज्यादा ज्वालामुखी गतिविधि क्यों रही और क्रीप सिग्नेचर का इतना असमान वितरण क्यों हैं। माना जाता है कि मंगल के आकार का एक पिंड जिसे थिया कहा जाता है, पृथ्वी से टकराया था। इस घटना की वजह से ही बहुत से टुकड़े, धूल अंतरिक्ष में उड़े थे। बाद इनके मिलने से ही चंद्रमा का निर्माण हुआ था। लेकिन वे सारे पदार्थ समान रूप से नहीं मिले थे। यह घटना 4.5 अरब साल पुरानी है। वही असमानता आज चांद के अगले और पिछले हिस्से की वजह है। वैज्ञानिकों को चंद्रमा के निर्माण के बाद वहां की घटनाओं का क्रम नहीं पता लग पाया है। इसके अलावा वहां हवा के न होने से अपरदन की घटना भी नहीं होती है। जिससे उन्हें घटनाक्रम में मदद नहीं मिल पा रही है। लेकिन वैज्ञानिकों को लगता है कि यह हाल अंतरिक्ष में दूसरे चंद्रमाओं का भी हुआ होगा।