कर्नाटक में बजरंग दल पर बैन लगाने के कांग्रेस पार्टी के प्रस्ताव के बाद भाजपा ने बजरंग दल के बचाव में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। कांग्रेस की घोषणा के बाद कर्नाटक के विजयनगर जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने भगवान हनुमान को ही ताले में बंद करने का फैसला लिया है। मोदी ने कहा कि पहले उन्होंने श्री राम को ताले में बंद किया और अब वो जय बजरंग बली कहने वालों को बंद करना चाहते हैं। मोदी के इस भाषण के बाद भाजपा के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर बजरंग दल का समर्थन किया और कांग्रेस की आलोचना की। भाजपा नेता और कर्नाटक के पूर्व उप मुख्यमंत्री केएस ईश्वरप्पा ने कांग्रेस के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कांग्रेस के घोषणापत्र की एक प्रति को जला डाला। साथ ही उन्होंने बजरंग दल को एक देशभक्त संगठन बताया और कहा कि कांग्रेस की उस पर बैन लगाने के बारे में बोलने की हिम्मत कैसे हुई।
उल्लेखनीय है कि बजरंग दल एक हिन्दुत्ववादी संगठन है, जो विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की युवा शाखा है। यह आरएसएस के संगठनों के परिवार का सदस्य है। संगठन की विचारधारा हिन्दुत्व (हिन्दू राष्ट्रवाद)पर आधारित है। 8 अक्तूबर 1984 को उत्तर प्रदेश में इसकी स्थापना की गई, यह तब से पूरे भारत में फैल गया। हालांकि इसका सबसे महत्वपूर्ण आधार देश का उत्तरी और मध्य भाग है। यह समूह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं के समान लगभग 2,500 अखाड़े चलाता है। बजरंग नाम हिन्दू राम भक्त हनुमान पर आधारित है। बजरंग दल का नारा है, सेवा, सुरक्षा और संस्कृृति दल का एक मुख्य लक्ष्य अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर, मथुरा में भगवान श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और वाराणसी में काशी विश्वनाथ मन्दिर का निर्माण करना है, जो वर्तमान में पूजा स्थल हैं। अन्य लक्ष्यों में साम्यवाद, मुस्लिम जनसांख्यिकीय विकास और ईसाई पंथ परिवर्तन के साथ-साथ गाय के वध को रोकने के लिए भारत के हिन्दू पहचान की रक्षा करना भी शामिल है। बजरंग दल एक हिंदूवादी समाज संगठन हैं। यह संगठन हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की न्यायिक भूमिका के लिए सदेव तैयार रहता है।
संगठन का दावा है कि इसके प्रत्येक कार्यकर्ता सुव्यवस्थित संस्कारी बुद्धिजीवी हैं इनके कार्य आपात काल में सेवा बस्तियों में जाकर सहायता प्रदान करना भी है। संगठन के नेताओं का दावा है कि यह संगठन हिंसा को बढ़ावा नहीं देता है, इनका भाव अहिंसा का होता है, परंतु हिंसा करने वाले लोगों के प्रति कठोरता पूर्वक कार्य करता है और सभी हिंदुओं की एकता को मजबूती प्रदान करता है। इसके संस्थापक अध्यक्ष विनय कटियार थे जो आगे चल कर बीजेपी के टिकट पर सांसद भी बने। कटियार बाबरी मस्जिद को गिराने के मामले में मुख्य आरोपियों में से थे, लेकिन सितंबर, 2020 में एक विशेष सीबीआई अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें और सभी आरोपियों को बरी कर दिया था, लेकिन बजरंग दल का नाम शुरू से सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े कई मामलों में सामने आता रहा है। दल गौ रक्षा को अपने लक्ष्यों में से एक बताता है लेकिन कई राज्यों में गौ रक्षा के नाम पर मुस्लिमों पर हमले में दल के सदस्यों पर शामिल होने के आरोप लगे हैं।
फरवरी में हरियाणा में दो मुस्लिम युवाओं की हत्या के आरोप में पुलिस को जिस मोंटू मानेसर की तलाश है वो बजरंग दल का ही स्थानीय नेता है। अप्रैल में कर्नाटक के रामनगर जिले में एक गौ व्यवसायी की हत्या के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था, उनमें से मुख्य आरोपी बजरंग दल का सदस्य था। गौ रक्षा के नाम पर हिंसा के अलावा बजरंग दल के सदस्य धर्मांतरण से जुड़े हिंसक मामलों में भी शामिल पाए गए हैं। इस सिलसिले में कई राज्यों में चर्चों और पादरियों पर हमले के मामलों में दल के सदस्य शामिल पाए गए हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कर्नाटक चुनाव में भाजपा ने बजरंग दल और बजरंग बली को एक मंच पर लाकर राजनीति की नई इबारत लिखी है, अब देखना है कि इस पर कर्नाटक की जनता क्या जनादेश सुनाती है, जिसके लिए हमें 13 मई को होनी वाली मतगणना तक इंतजार करना होगा।