हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। ये पौधा जिस भी व्यक्ति के घर में होता है, उसके घर कभी दुर्भाग्य नहीं आता है। घर के पूजा और अनुष्ठान में तुलसी का प्रयोग किया जाता है। ऐसा कहते हैं, कि भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय हैं। इसलिए हर पूजा में तुलसी का प्रयोग खासकर किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी रूपी वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त थीं। इतना ही नहीं, तुलसी पौधा के घर में होने से सकारात्मकता का संचार होता है। घर में सुख-शांति आती है। बिना तुलसी पत्ते के कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। लेकिन अब ऐसे में क्या आप जानते हैं, कि तुलसी को घर में रखने से और उनके पत्तों को तोड़ने के भी नियम होते हैं। जिनका पालन करना बेहद जरूरी है, वरना आपकी जिंदगी में कई प्रकार की समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है। तो ऐसे में आइए आज हम आपको अपने इस लेख में तुलसी पत्ते तोड़ने के नियम के बारे में बताएंगे।

तुलसी के पत्ते तोड़ने के नियम :

1.धार्मिक दृष्टि से देखा जाए, तो तुलसी के पौधे का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में लगभग हर घर में तुलसी का पौधा होता है, जिसका पूजा करना चाहिए और शाम के समय घी का दीपक जलाना चाहिए। शास्त्रों में बताया गया है कि अमावस्या, द्वादशी और चतुर्दशी तिथि को तुलसी के पौधे में भूलकर भी नहीं तोड़ना चाहिए। इसलिए इस बात का खास ध्यान रखें।

2.ऐसी मान्यता है कि  रविवार के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से परहेज करना चाहिए, इस दिन तुलसी के पौधे में जल भी अर्पित नहीं करना चाहिए।

3.ऐसा कहा जाता है कि तुलसी के पत्ते को तोड़ते समय विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। कभी भी तुलसी के पत्तों को नाखुन से नहीं तोड़ना चाहिए। तुलसी के पत्ते को हल्के हाथ से तोड़ना चाहिए।

4.अगर घर में लगा हुआ तुलसी का पौधा सूख गया है तो उसे गमले या जमीन में से निकाल कर किसी नदी में प्रवाहित कर दें। इसे कूड़ेदान में या किसी अन्य जगह पर नहीं फेंकना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि सूखे हुए तुलसी के पौधे को घर में ज्यादा दिन तक नहीं रखना चाहिए, इससे घर में नकारात्मकता का संचार होता है।

5. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु, श्री कृृष्ण और वीर बजरंगबली को तुलसी अधिक प्रिय है। इसलिए इनकी पूजा में तुलसी के पत्तों का होना बेहद जरूरी है। ऐसा कहते हैं कि पूजा के दौरान इन देवी-देवताओं को तुलसी पत्र चढ़ाने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। लेकिन इस बात का खास ध्यान रखें कि भगवान शिव और गणेश जी की पूजा में भूलकर भी तुलसी के पत्तें न चढ़ाएं।