हर साल 4 मई को अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस मनाया जाता है, ताकि उन साहसी लोगों को सम्मानित किया जा सके, जो दूसरों को बचाने के लिए खुद की जान जोखिम में डालते हैं। यह दिन उन लोगों की सराहना करने का एक अवसर है, जो बहादुरी और नि:स्वार्थ की भावना से समाज की सेवा कर रहे हैं। जलती हुई इमारतों से लेकर जंगल की आग तक दमकलकर्मी कहीं भी किसी भी पल लगी जानलेवा आग को शांत करने के लिए तत्पर रहते हैं। चलिए जानते हैं कि इस दिन की शुरुआत कैसे और क्यों हुई। साल 1999 में दुनिया भर में अग्निशामकों के बलिदान और बहादुरी का सम्मान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस की स्थापना की गई थी।

जंगल में लगी आग को शांत करते हुए पांच ऑस्ट्रेलियाई अग्निशामकों ने अपनी जान गंवा दी थी और इस वार्षिक कार्यक्रम की प्रेरणा उन्हें करते हुए ली गई है। जेसन थॉमस, क्रिस इवांस, गैरी व्रेडेवेल्ट, मैथ्यू आर्मस्ट्रांग और स्टुअर्ट डेविडसन सभी बहादुर अग्निशामकों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवा दी। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के परिणामस्वरूप, अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस बनाया जाता है। तब से यह दिन एक वैश्विक घटना के रूप में विकसित हो गया है, जो हर जगह अग्निशामकों के साहस, शक्ति और निस्वार्थता को दर्शाता है और उनका जश्न मनाता है। ये दिन मानवजाति की भलाई के लिए उनके अमूल्य योगदान और आग के खतरों से जीवन और संपत्ति की रक्षा करने की उनकी अटूट प्रतिबद्धता की याद दिलाता है।

अंतर्राष्ट्रीय अग्निशामक दिवस बहुत महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह अग्निशामकों के असाधारण साहस और बलिदान को उजागर करता है। खुद आग और अन्य संकटों से डरे बिना दूसरों को बचाने के लिए वे हमेशा तत्पर रहते हैं। यह अवसर उनकी अटूट बहादुरी, निस्वार्थता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता के मार्मिक स्मरण के रूप में मनाया जाता है। इतना ही नहीं, इस दिन को अग्नि सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देने और अग्निशामकों को उनके महत्वपूर्ण कर्तव्यों को पूरा कर ने के लिए आवश्यक संसाधनों और उपकरणों से लैस करके उन्हें पर्याप्त सहायता प्रदान करने के महत्व पर भी जोर देता है। अंतर्राष्ट्रीय अग्निशामक दिवस के प्रतीक के रूप में लाल और नीले रंग का एक रिबन दर्शाया जाता है।