ट्रैफिक नियमों का पालन करना हर किसी के लिए बेहद जरूरी होती है। जैसे ही ट्रैफिक सिग्नल पर लाल लाइट नजर आती है, वैसे ही गाडिय़ां रुक जाती हैं, फिर जैसे ही सिग्नल हरा दोता है, गाडिय़ां चलने लगती हैं। रंगों का भेद और उनका अर्थ तो लगभग हर कोई जानता होगा। आप ये भी जानते होंगे कि अधिकतर शहरों में ट्रैफिक लाइट्स गोल आकार की होती हैं, पर क्या आपने कभी दिल के आकार की ट्रैफिक लाइट्स को देखा है? आज हम आपको एक शहर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां दिल के आकार की ट्रैफिक लाइट्स  दिखाई देती हैं। एटलस ऑब्सक्योरा वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार आइसलैंड के शहर अकुरेरी  में दिल के आकार की लाल ट्रैफिक लाइट्स होती हैं।

आइसलैंड बेहद ठंडा देश है। सर्दी के मौसम में ये देश बर्फ के रेगिस्तान जैसा हो जाता है। यहां 6 महीने तक अंधेरा रहता है और -38 डिग्री सेल्सियस तक तापमान चला जाता है। इस वजह से अक्टूबर से लेकर अप्रैल तक ये देश पूरी तरह से कट जाता है। यहां की काफी आबादी ठंड से निपटने के लिए दूसरे देश छुट्टियां मनाने चली जाती है। कई बार लोगों और देश की आर्थिक रूप से अस्थिरता इन छुट्टियों को मुमकिन नहीं कर पाती और लोगों को देश में समय गुजारना पड़ता है। आइसलैंड में फाइनैंशियल क्रैश साल 2008 में आया था।

देश की आर्थिक अस्थिरता और खराब मौसम को ध्यान में रखते हुए अकुरेरी शहर के पूर्व मेयर और प्रशासन ने ये फैसला लिया कि जो लोग ठंड के दिनों में देश में रुक जाते हैं, बाहर नहीं जा पाते, उनके हौसलों को बुलंद किया जाए और उनके प्रति संवेदनशील रवैया अपनाया जाए। पूर्व मेयरEirikur Bjorn Bjorgvinsson ने साल 2013 में हफिंग्टन पोस्ट वेबसाइट से बात करते हुए कहा था कि वित्तीय मंदी के बाद नागरिकों को ये एहसास दिलाने के लिए कि जिंदगी में रुपए पैसे नहीं, प्यार मायने रखता है और ये बताने के लिए प्रशासन उनके साथ है, ट्रैफिक लाइट्स पर दिल का इस्तेमाल किया गया। जब लोग क्रॉसवॉक और चौराहों से गुजरें तो इस दिल को देखकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाए, यही मकसद था। दिल सिर्फ रेड लाइट होने पर ही दिखता है। इसलिए जब गाडिय़ों को रोकता होता है तब रेड सर्कल की जगह रेड हार्ट बनकर आता है।