सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के आंदोलन के गर्भ से पैदा हुआ आम आदम पार्टी का असली चेहरा सामने आने लगा है। राजनीति में पदार्पण करने के बाद केजरीवाल ने अपने कार्यकर्ताओं तथा जनता से वादा किया था कि वे साधारण घर में रहेंगे तथा वीआईपी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करेंगे। लेकिन राजनीति में आने के बाद धीरे-धीरे केजरीवाल अन्य राजनेताओं की तरह व्यवहार करने लगे। अपने को कट्टर ईमानदार होने का दावा करने के बावजूद हाल ही में केजरीवाल के शीश महल के बारे में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। ऐसी खबर है कि केजरीवाल ने मरम्मत के नाम पर अपना नया बंगला बनाने पर 45 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह काम वर्ष 2020 से गुपचुप तरीके से चल रहा था। लेकिन हाल ही में इस बारे में जो खुलासा हुआ है उससे लोगों के सामने असलियत सामने आने लगी है।

केजरीवाल ने मुख्यमंत्री आवास के बगल में ही एक नया बंगला बनवाया जो पहले के घर के मुकाबले दोगुने से ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है। नया घर 1212 वर्गमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। केजरीवाल ने पुराने घर को तुड़वाकर बैडङ्क्षमटन एवं टेनिस कोर्ट के साथ-साथ पूरा लॉन बना दिया है। उस नए घर में कुल 23 परदे लगे हैं जिसमें 8 लाख कीमत के परदे भी शामिल हैं। नए घर के निर्माण के लिए वियतनाम से विशेष मार्बल मंगाए गए जिसकी कीमत 1.15 करोड़ बताई गई है। इसके अलावा उस घर में बहुत ऐसी चीजें लगाई गई हैं, जिसकी कीमत सुनकर लोग चौंक रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने को आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधि कहने वाले केजरीवाल को इतने महंगे घर की क्यों जरूरत पड़ गई? अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उसके हिसाब से इस कार्य में कानूनों का उल्लंघन हुआ है। इसके निर्माण के लिए पहले टेंडर होना चाहिए था, जो नहीं हुआ। इसके अनुमोदन से पहले ही काम शुरू हो चुका था। मालूम हो कि केजरीवाल ने कहा था कि हम दिल्ली के पर्यावरण के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे।

दिल्ली के मेट्रो, नेशनल हाईवे, एम्स, सीआरपीएफ हाउङ्क्षसग एवं सेंट्रल विस्टा, की अनुमति को दिल्ली सरकार ने कई महीनों तक लटकाए रखा। पर्यावरण की अनुमति देने के लिए उन्होंने इन सारी योजनाओं को ठंडे बस्ते में रखा था। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अपने बंगले के निर्माण कार्य के लिए पेड़ काटने की मंजूरी आनन-फानन में ही दे दिया। इस तरह के दोहरे मापदंड को लेकर लोगों में तीखी प्रतिक्रिया है। दिल्ली में एक पेड़ काटने के बदले 10 पेड़ लगाने का प्रावधान रखा गया था, ङ्क्षकतु केजरीवाल के निवास के लिए जितने भी पेड़ काटे गए उसके बदले आज तक कोई नया पेड़ नहीं लगाया गया। इसके बारे मे वन विभाग ने नोटिस भी दिया था, ङ्क्षकतु सरकार उस पर कोई तवज्जो नहीं दी है। अब मामला सार्वजनिक होने के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं को सफाई देते नहीं बन रही है। प्रश्न यह उठता है कि अगर मुख्यमंत्री के लिए अलग बंगला बनवाना ही था तो उसके लिए सामान्य प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया? यह सब काम गुपचुप तरीके से क्यों किया गया? मुख्यमंत्री के बंगले पर इतना खर्च तब किया गया जब दिल्ली जनता कोरोना महामारी के प्रकोप से कराह रही थी।

लोग ऑक्सिजन के बिना अपनी जान गंवा रहे थे, उस वक्त इस तरह का काम करना शोभा नहीं देता। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बंगला के निर्माण के लिए कम-कम धन राशि का बजट अनुमोदित किया गया ताकि लोगों की नजर में नहीं पड़े। अब इस घटना ने राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्षी पाॢटयां केजरीवाल पर हमलावर हैं। जबकि आम आदमी पार्टी उनके बचाव में खड़ी है। कुल मिलाकर यह मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। मालूम हो कि वर्ष 2013 में सत्ता में आने के बाद केजरीवाल ने कहा था कि वे मुख्यमंत्री के बंगले में नहीं, बल्कि दो बेडरूम वाले फ्लैट में रहेंगे क्योंकि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता भी यही चाहते हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान में पहली बार मुख्यमंत्री का शपथ लेने के लिए केजरीवाल मेट्रो से पहुंचे थे। उस समय की स्थिति और आज की स्थिति में काफी अंतर है। आज केजरीवाल के साथ 28 वाहनों का काफिला चलता है, जिसमें 100 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी साथ रहते हैं। इस खुलासे से केजरीवाल के राजनीतिक साख पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ेगा।