प्रेमलता खंडेलवाल ‘हरि-प्रिया’
कोरोनाकाल में वर्चुअल जूम के माध्यम से बीते रविवार दिनांक 26 जून को पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्लेटफॉर्म से अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन के पदाधिकारियों की उपस्थिति में ‘‘असम की मारवाड़ी जाति का इतिहास’’ पुस्तिका का विमोचन हुआ- यह प्रसन्नता का विषय है। बैठक में कार्यकारी सदस्य होने के नाते मैं भी उपस्थित थी। मेरी आंखों के सामने चलचित्र की तरह वह मंजर आता रहा जब स्वर्गीय जी. एल. अग्रवालाजी इस पुस्तिका को छपवाने के लिए मुझसे फोन पर बात किया करते थे। वे मारवाड़ियों के कार्यों को असमवासियों के बीच प्रस्तुत करना चाहते थे और उनके वर्चस्व का डंका बजाना चाहते थे। वे कहते थे कि वे इस क्षेत्र में बराबर कार्य कर रहे हैं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्र में भेजकर दस्तावेज इकट्ठा कर रहे हैं। बहुत उत्साह था उनके मन में और वे सदैव इस कार्य में लगे रहते थे। वे इस कार्य के लिए लोगों से फोन के माध्यम से भी जुड़े रहते थे और सबकी राय भी लेते थे। वे कहते थे कि उन्होंने इस कार्य के लिए कई बुद्धिजीवियों को भी इस काम के लिए दायित्व सौंपा है। उन दिनों उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता था। बावजूद इसके वे ऑफिस में आते थे और कार्यरत थे। इस कार्य के लिए उनकी एक टीम थी-जिसका जिक्र मैं यहां नहीं करना चाहती। वे कहते थे कि जल्द ही उनका यह कार्य पूरा हो जाएगा और वे बड़े रूप में इस पुस्तक का विमोचन करवाएंगे । एक दिन वे फोन पर रोने लगे और उन्होंने कहा कि मेरी सब पुस्तकें एवं एकत्रित की गई सामग्री उन्हीं की टीम के किसी व्यक्ति ने यह कहकर ले ली थी कि आने-जाने में वक्त लगता है, अतः घर से वह व्यक्ति कार्य करेगा। इतिहास लेखन टीम के उक्त व्यक्ति से उनका कुछ समय तक संपर्क नहीं हुआ। पुस्तिका का लगभग ज्यादा से ज्यादा कार्य हो गया था। धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य खराब होने लगा और इस पुस्तिका को छपवाने की इच्छा को मन में लिए वे इस दुनिया से चले गए। अब इसका विमोचन हुआ है - इसका श्रेय स्व. जी. एल. अग्रवाला को है। यदि उनकी ऊंची सोच न होती, इसको लेकर समाज के लिए इतना प्रयास न होता तो आज यह पुस्तिका डॉ. श्यामसुंदर हरलालका हमारे बीच प्रस्तुत न कर पाते। मुझे जितनी जानकारी है, वह मैंने अक्षरशः प्रस्तुत कर दी है। चूंकि यह मेरा कर्तव्य था और समाज को इस पुस्तिका को पढ़ते समय स्व. जी.एल. अग्रवाला को मन ही मन धन्यवाद देना आवश्यक भी है। हर समाजसेवी के कार्यों का मूल्यांकन होना और जानकारी होना आवश्यक है। यह एक तरह से उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। चूंकि उनकी ओर से रह गए अधूरे कार्य की पूर्णता की जानकारी मैंने समाज को दी है। मैं उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करती हूं। समाज सेवा दैनिक कार्य है और इस यज्ञ में आहूति देने वाले एक व्यक्ति के सेवा कार्यों की जानकारी होना भी आवश्यक है। अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष गोवर्धन प्रसादजी गाड़ोदिया के कर कमलों से पुस्तिका का विमोचन हुआ और इस मौके पर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सीतारामजी शर्मा विशिष्ट वक्ता थे, यह प्रसन्नता का विषय है। मैं इस कार्य के लिए उन्हें धन्यवाद देती हूं एवं आभार प्रकट करती हूं।