वास्तु शास्त्र में किचन के लिए भी नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन अनिवार्य होता है। ये नियम न केवल किचन की वस्तुओं पर लागू होता है, बल्कि भोजन पकाते समय भी इन नियमों का ध्यान रखना चाहिए। अनदेखी करने पर घर में वास्तु दोष लगता है। इससे पति-पत्नी के रिश्ते बिगड़ जाते हैं। साथ ही आर्थिक तंगी भी आती है। इसके लिए महिलाएं वास्तु नियमों का पालन करती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आटा गूंथने के समय भी वास्तु नियम का पालन जरूरी है? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

-वास्तु जानकारों की मानें तो आटा गूंथने के बाद गोला बनाएं, तो उसमें उंगलियों का निशान बना दें। अगर नहीं करती हैं, तो गोले से बनी रोटियां खाने से पितृ दोष लगता है। सनातन धर्म में पिंडदान के समय चावल के आटे को गूंथ कर गोला बनाया जाता है। इससे पिंडदान किया जाता है। इसके लिए आटा गूंथने के बाद उंगलियों का निशान जरूर बना दें।

-आटा गूंथने के बाद बचे पानी को यूं व्यर्थ न बर्बाद करें। आटा गूंथने के बाद बचे पानी को पौधे में डाल दें। आप चाहे तो अन्य कामों में भी पानी का उपयोग कर सकती हैं।

-एक बार आटा गूंथने के बाद तुरंत रोटियां बना लें। अगर देर से रोटियां बनाते हैं, तो न केवल वास्तु दोष लगता है, बल्कि रोटियां कीटाणु युक्त हो सकती हैं।

-बचे आटे को फ्रिज में रखकर अगली बार इस्तेमाल करना सेहत के लिए सही नहीं होता है। इससे कई बीमारियां दस्तक देती हैं। इसके लिए ज्यादा आटा न गूंथे। आयुर्वेद में बासी खाना खाने की मनाही है।

-एक बार रोटियां बन जाएं, तो चकला, बेलन और तवा को सही से साफ कर लें। चकला बेलन को गंदा नहीं रखना चाहिए। रोजाना इस्तेमाल के बाद अन्य बर्तनों की तरह चकला बेलन को भी धोएं। चकला-बेलन को गंदा रखने से वास्तु दोष लगता है। इससे मां अन्नपूर्णा यानी मां पार्वती रुष्ट होती हैं।

-वास्तु जानकारों की मानें तो नहाने के बाद आटा गूंथना चाहिए। वहीं, आटा गूंथने के लिए तांबे के बर्तन में पानी लेना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। वास्तु दोष लगने से पारिवारिक कलह की स्थिति पैदा होती है। इसके लिए महिलाओं को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

-आटा गूंथने के बाद ढक कर रखें।