मध्यप्रदेश के दंतेवाड़ा में नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी ब्लास्ट में 10 जवान शहीद हो गए। इस हमले में प्राइवेट वाहन का चालक भी मारा गया। यह घटना उस वक्त हुई जब डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के जवान नक्सलियों के छिपे होने की खबर पाकर तलाशी अभियान के लिए गए हुए थे। लौटते वक्त दंतेवाड़ा के अरनपुर मार्ग के पालनार में छिपे आतंकियों ने जवानों के वाहन पर आईईडी ब्लास्ट किया। उस वाहन में 25 से 30 जवान होने की खबर है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। घायल जवानों को चार एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया है। पिछले सप्ताह बीजापुर में कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी के काफिले पर भी हमला हुआ था।
उस वक्त भी नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। यह क्षेत्र हमेशा से नक्सलियों के निशाने पर रहा है। अप्रैल 2021 में बीजापुर के तर्रेम में नक्सलियों ने बैरल ग्रेनेड लांचर से जवानों के काफिले पर हमला किया था। इस हमले में 22 जवान शहीद हो गए थे, जबकि 35 जवान घायल हो गए थे। दंतेवाड़ा में हमेशा से नक्सलियों एवं सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ चलती रहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि नक्सलियों को खत्म करने का अभियान जारी रहेगा।
नक्सलियों के खिलाफ चल रहा अभियान अंतिम चरण में है, जिससे नक्सली बौखलाए हुए हैं। मालूम हो कि फरवरी से मई के बीच नक्सली टैक्टिकल काउंटर ऑफ आफेंसिव कैंपेन चलाते रहते हैं। इस दौरान नक्सली नए कैडरों की भर्ती करते हैं तथा उन्हें हथियार एवं ग्रेनेड आदि चलाने का प्रशिक्षण देते हैं। नए कैडरों को सुरक्षा बलों पर हमला करने के लिए मौका देते हैं। यही कारण है कि फरवरी से मई के बीच नक्सली गतिविधियों में तेजी आ जाती है तथा सुरक्षा बलों पर हमले बढ़ जाते हैं। नक्सलियों के ङ्क्षवग पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला नए कैडरों को ट्रेङ्क्षनग देते हैं।
अगर हम पिछले 10 वर्ष पर नजर डालें तो इस क्षेत्र में नक्सलियों के हमले में 250 से ज्यादा जवान शहीद हो गए थे। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज हुआ है। सरकार नक्सलियों को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानती है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने नक्सलियों के खात्मे के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस के जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया है।
अभियान चलाने के लिए सरकार हेलीकॉप्टर सहित दूसरी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई है। हालांकि पहले से नक्सली गतिविधियों में कमी जरूर आई है, ङ्क्षकतु अभी भी छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड एवं आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में नक्सली सक्रिय हैं। इनकी कमर तोड़ने के लिए बाहर से मिल रहे आॢथक मदद को रोकना होगा। साथ में स्थानीय जनता का जो समर्थन मिल रहा है, उसको रोकने के लिए सरकार को कदम उठाना होगा। नक्सलियों द्वारा अभी जो विशेष अभियान चलाया जा रहा है उसके दौरान और कई घटनाएं हो चुकी हैं। 23 मार्च 2021 को नारायणपुर के कोहकामेटा में आईडी ब्लास्ट में पांच जवान शहीद हो गए थे। इससे पहले 21 मार्च 2020 को सुकमा के मीनपा में हुए हमले में 17 जवान शहीद हो गए थे।
25 अप्रैल 2017 को सुकमा के बुर्कापाल बेस कैंप पर हुए हमले में सीआरपीएफ के 32 जवान शहीद हुए थे। 6 मई 2017 को सुकमा के कसालपाड़ा हमले में 14 जवानों की शहादत हुई थी। मार्च 2017 में ही सुकमा के भेजी इलाके में हुए हमले में सीआरपीएफ के 11 जवान शहीद हुए थे। 12 अप्रैल 2015 को दरभा में हुए हमले में पांच जवान शहीद हुए थे। इस घटना में एंबुलेंस ड्राइवर और स्वास्थ्यकर्मी की भी मौत हुई थी। 11 मार्च 2014 को टहकावाड़ा नक्सली हमले में 15 जवानों की शहादत हुई थी। मई 2013 में झीरमघाटी हत्याकांड में 30 से अधिक कांग्रेस नेता और जवान शहीद हुए थे।
छह अप्रैल 2010 को ताड़मेटला हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि नक्सली कितने खूंखार हैं। इनका नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है। यही कारण है कि किसी एक राज्य में सुरक्षाबलों द्वारा दबाव बढ़ाने पर वे दूसरे राज्यों में चले जाते हैं। केंद्र सरकार ने नक्सलियों से निपटने के लिए अर्द्धसैनिक बलों को प्रशिक्षित कर मोर्चे पर लगाया है। इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों के बीच समन्वय होना भी जरूरी है।