कोरोना व कर्फ्यू के चलते एक ओर जहां लोग अपने परिवार के लिए ज्यादा से ज्यादा समय निकाल पा रहे हैं तो दूसरी ओर यहीं चीजें कपल्स के बीच झगड़े की वजह बन रही है। ऐसे में कई बार मनमुटाव की स्थिति सामने आ रही है। पति-पत्नी के रिश्ते में भी दरार-सी आ गई है। झाडू लगाने से लेकर रोटी-सब्जी बनाने जैसी छोटी-छोटी बातों पर रोज पति-पत्नी के बीच विवाद हो रहे है और घरेलू हिंसा की शिकायत बढ़ रही है। कोरोना के चलते कइयों की नौकरी चली गईं तो कइयों के घर तबाह हो गए। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गुवाहाटी के थानें में पहले प्रतिदिन 8-10 घरेलू हिंसा के मामले सामने आते थे, लेकिन लॉकडाउन व कर्फ्यू के दौरान इनकी संख्या 15 से 20 तक पहुंच गई। कई थानों में आनेवाली शिकायतों से पता चला कि कुछ मामलों में तो मारपीट तक की नौबत आ चुकी है। बीते दिनों से काम नहीं मिलने के चलते हातीगांव में एक राजमिस्त्री ने अपनी पत्नी को ही चाकू मार कर मौत के घाट उतार दिया और खुद आत्महत्या करने की भी कोशिश की।बीते दिनों हातीगांव थाना अंतर्गत विष्णुज्योति निवासी व राजमिस्त्री कातीराम दास ने अपनी पत्नी मर्जिना खातून पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर मौत के घाट उतार दिया। राजमिस्त्री को कर्फ्यू के चलते काम नहीं मिल रहा था, जिससे वह आर्थिक रुप से परेशान था। कमजोर माली हालत और गरीबी के चलते रोज घर में झगड़े होते थे। राजमिस्त्री घर में खाने का समान नहीं ला पा रहा था, जिसके चलते रोज झगड़े होते थे। यह सिर्फ राजमिस्त्री के ही घर की कहानी नहीं, बल्कि अब हर गरीब व आम लोगों के घर कहानी बनकर रह गई है।  कई बार तो पुलिस को घर जाकर मामले को शांत भी करना पड़ा। कई मामले तो बेकारी व नौकरी छूटने के चलते सामने आए तो कइयों ने तो अपनी इहलीला तक समाप्त कर ली। कुछ पीड़ित महिलाएं लॉकडाउन व कर्फ्यू खत्म होने का इंतजार कर रही हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ मामले घरेलू कामों में हाथ नहीं बंटाने और मोबाइल पर व्यस्त  रहने के कारण भी सीमने आ रहे हैं। कई घरों में तो कोरोना के चलते काम करने वाली नहीं आ रही है तो कोरोना फैलने के डर से कइयों ने आने से मना कर दिया, इससे घर का सारा काम पत्नियों को करना पड़ रहा है। मदद नहीं मिलने पर झड़प हो रहे हैं। यहां तक कि पति के हर समय मोबाइल पर  व्यस्त होने से घर के काम से लेकर बच्चों की देखभाल पत्नियों को करना पड़ रहा है। कोरोना रोकने के  लिए जारी कर्फ्यू ने आम गरीबों के जीवन को बेहाल कर दिया है। नौकरी-चाकरी खोकर आर्थिक परेशानी के चलते बेहाल व बर्बाद  हुए लोग आत्महत्या करने को बाध्य है।