जयपुर : जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री पद का सीरियस उम्मीदवार बताते हुए कहा कि अगर उनके भाग्य में है तो वह प्रधानमंत्री जरूर बनेंगे। मलिक ने यह भी कहा कि उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले का मुद्दा, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दिन भी उठाया था और बाद में भी उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह किसानों का मुद्दा भी उन्होंने समय समय पर उठाया है। उल्लेखनीय है कि मलिक ने हाल ही में एक साक्षात्कार में पुलवामा हमले के बारे में कहा था कि यह केंद्र सरकार की विफलता थी। उनके (मलिक के) इस बयान पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सवाल किया था कि जब मलिक राज्यपाल थे तब उन्होंने कुछ क्यों नहीं कहा था? सीकर के दौरे पर आए मलिक ने सोमवार को कहा कि मैंने तब भी पुलवामा मुद्दे को उठाया था, उसी दिन, अगले दिन और फिर बाद में भी कई बार उठाया था।
जब मैं राज्यपाल था तब भी मैंने किसानों का मुद्दा उठाया था। यह कहना गलत है कि जब मैं पद से हट गया तब मैंने यह उठाया। पुलवामा जिले के अवन्तीपोरा में 14 फरवरी 2019 को, जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारतीय सुरक्षा कर्मियों को ले जाने वाले सीआरपीएफ के वाहनों के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 40 भारतीय सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए थे। मलिक ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बारे में पूछने पर सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि मैं उनके बारे में कैसे टिप्पणी कर सकता हूं। वह प्रधानमंत्री पद के 'सीरियस उम्मीदवारÓ हैं और उनके भाग्य में होगा तो (प्रधानमंत्री) अवश्य बन जायेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अडाणी समूह से जुड़े मुद्दे पर कुछ नहीं बोला है जिससे उन्हें नुकसान होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को पुलवामा मुद्दे पर भी बोलना चाहिए और अगर कोई जांच हुई है तो कार्रवाई होनी चाहिए। सीकर में सर्किट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत में सत्यपाल मलिक ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां उनके (भाजपा) लिये कठिन है। उनको कुछ चीजों को करना पड़ेगा। एक तो अडाणी वाले मामले में प्रधानमंत्री ने जवाब नहीं दिया है, संसद में वह बोले लेकिन अडाणी वाले मामले पर कुछ नहीं कहा। उस पर अगर वह नहीं बोलेंगे तो नुकसान हो जायेगा। और पुलवामा मुद्दे पर भी उनको स्पष्टीकरण देना चाहिए। अगर कोई जांच हुई है तो कार्यवाही करनी चाहिए। मलिक ने कहा कि अगर 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार खड़ा करता है तो मोदी कहीं नहीं होंगे क्योंकि जनता ही (जीत और हार का) फैसला करती है।