पर्यावरण संरक्षण को लेकर मिलकर शोध करने के लिए गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालई पर्यावरण संस्थान और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के मध्य एक करार पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों संस्थानों के अधिकारियों ने कहा कि इससे विभिन्न शोध और विकास कार्यों को एक नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालई पर्यावरण संस्थान के निदेशक और हंबोल्ट फैलो प्रोफेसर सुनील नौटियाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभावों से बचने के लिए हिमालय के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के कुलपति प्रोफेसर अन्नपूर्णा ने अंतर्राष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बसे गांवों में स्थानीय सांस्कृृतिक संग्रहालय खोलने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे संस्कृृति का आदान-प्रदान होगा। उन्होंने कहा कि हमें अपनी विभिन्नता और अखंडता का सदुपयोग करते हुए स्थानीय ज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के निराकरण के लिए उपयोग करना चाहिए। संचालन प्रोफेसर आरसी सुंद्रियाल ने किया। कार्यक्रम में प्रोफेसर आरके मैखुरी, प्रोफेसर प्रकाश नौटियाल, प्रोफेसर प्रशांत कंडारी, डॉ. जेसी कुनियाल, डॉ. आईडी भट्ट समेत कई लोग मौजूद रहे।