असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद कहा है कि दोनों राज्यों के सीमा विवाद का 90 प्रतिशत से ज्यादा समाधान हो चुका है। केवल दस गांवों को लेकर मामला अभी भी उलझा हुआ है जिस पर जल्द ही सहमति बन जाएगी। अभी हाल ही में असम के कृृषि एवं सीमाई मामलों के मंत्री अतुल बोरा की पिछले सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के मंत्री के साथ गुवाहाटी में बैठक हुई थी, उस बैठक में बाकी के विवादों को हल करने की दिशा में सहमति बनी है। नगर के कोइनाधारा स्थित गेस्ट हाउस में दोनों राज्यों के 12 क्षेत्रीय समितियों के अध्यक्षों एवं सांसदों की उपस्थिति में अतुल बोरा ने इसकी घोषणा की। क्षेत्रीय समितियों की रिपोर्ट के आधार पर नई दिल्ली में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में इस समस्या का हल निकालेंगे। गुवाहाटी की बैठक में संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका एवं अरुणाचल के मंत्री मामा नाटुंग भी उपस्थित थे।

मालूम हो कि असम और अरुणाचल के बीच 804 किलोमीटर लंबी सीमा है। पहले अरुणाचल का नाम नेफा रखा गया था। उसके बाद इसका नाम बदल कर अरुणाचल प्रदेश किया गया। नेफा के गठन के साथ ही सीमा विवाद शुरू हो गया था। उस वक्त कई प्लेन क्षेत्रों को परंपरा तथा रहन-सहन के आधार पर असम को स्थानांतरित करने की मांग उठने लगी थी। विकास की प्रक्रिया तेज होने के साथ ही विवाद एवं दावे को लेकर झगड़ा बढ़ने लगा। सामाजिक एवं आर्थिक आधार पर चल रहे सीमा विवाद ने राजनीतिक रंग लेना शुरू किया। दोनों राज्यों के राजनेता सीमा विवाद की ज्वाला में अपनी रोटी सेंकने लगे। 1965 से ही सीमा विवाद के हल के लिए कई उच्च स्तरीय कमेटियों के गठन हुए, किंतु समस्या का समाधान नहीं हो सका। दोनों राज्यों के सीमा विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने इसके समाधान के लिए कमीशन का भी गठन किया, किंतु राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण मामला अधर में लटका रहा।

दोनों राज्यों के नेता इस मामले में कोई भी जोखिम लेने को तैयार नहीं थे। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए पूर्वोत्तर के राज्यों के बीच सीमा विवाद के हल के लिए मजबूत पहल शुरू की। दोनों राज्यों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 15 जुलाई 2022 को अरुणाचल के नामसाई में अरुणाचल के मुख्यमंत्री के साथ बैठक की। उस बैठक को नामसाई घोषणा पत्र कहा गया। उस वक्त 123 गांवों को लेकर विवाद चल रहा था। हिमंत ने केवल अरुणाचल ही नहीं, बल्कि नगालैंड, मिजोरम एवं मेघालय के मुख्यमंत्रियों के साथ भी सीमा विवाद के हल के लिए पहल शुरू की। मेघालय के साथ भी ज्यादातर सीमा समस्या का हल कर लिया गया है। बाकी के मुद्दों पर जल्द समाधान होने की जरूरत है। नगालैंड एवं मिजोरम के साथ भी सीमा समस्या के समाधान के लिए बातचीत प्रगति पर है। अगर पूर्वोत्तर के राज्यों के बीच सीमा समस्या का हल हो गया तो विकास की गति और तेज होगी तथा आपसी विश्वास बढ़ेगा।