शकुनशास्त्र में पशु-पक्षियों से जुड़े संकेतों के बारे में विस्तार से बताया गया है। ऐसे में कबूतर को सुख और शांति का प्रतीक माना जाता है।शकुनशास्त्र में पशु-पक्षियों से जुड़े संकेतों के बारे में विस्तार से बताया गया है। ऐसे में कबूतर को सुख और शांति का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि कबूतर मां लक्ष्मी का भक्त है और यदि घर में कबूतर अंडे देता है तो यह शुभ माना जाता है। जिस घर में कबूतर का वास होता है और या कबूतर बार-बार आता है तो उसे भी शुभ माना जाता है।
आइए जानते हैं कि शकुनशास्त्र में कबूतर को लेकर कुछ शुभ अशुभ बातों का जिक्र किया गया है -
कबूतर का घोंसला बनाना शुभ संकेत : कई बार घर की बालकनी, छत या एसी पर कबूतर घोंसला बना लेते हैं। शकुनशास्त्र में कबूतर का घोंसला बनाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि घर की गैलरी में कबूतर का घोंसला बनाना घर में सौभाग्य लेकर आया है, इसलिए उसके घोंसले को हटाना नहीं चाहिए।
गौरेया का घोंसला बनाना शुभ : वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में चिड़िया का घोंसला बनाना बहुत ही शुभ माना जाता है, लेकिन कबूतर का घोंसला बनाना अशुभ होता है। सनातन धर्म के सभी देवताओं के वाहन के रूप में पक्षी हैं। भगवान कार्तिकेय के लिए मोर, देवी सरस्वती के लिए हंस, विष्णु के लिए गरुड़, शनि देव के लिए कौआ, मां लक्ष्मी के लिए उल्लू और कई अन्य उदाहरण हैं। इस कारण देवी-देवताओं के साथ-साथ उनकी भी पूजा की जाती है।
देवी लक्ष्मी का उपासक है कबूतर : अक्सर गौरेया या कबूतर अक्सर घरों के अंदर अपना घोंसला बनाते हैं। कबूतरों को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी लक्ष्मी का उपासक माना जाता है। कबूतरों के घर आते ही कहा जाता है कि यह दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल देता है। जिस घर में वे रहते हैं वह हमेशा आनंद और सद्भाव से भरा होता है।