वैसे लोकसभा चुनाव में एक साल से ज्यादा समय बाकी है, परंतु अभी से ही पक्ष-विपक्ष दोनों ओर से इसकी तैयारी शुरू हो गई है। दूसरी ओर आए दिन इसको लेकर बयानबाजी भी हो रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते मंगलवार को डिब्रूगढ़ में दावा किया कि भाजपा लोकसभा चुनाव में 300 से अधिक सीटें जीतेगी और मोदी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। दूसरी ओर जब नीतीश कुमार एनडीए छोड़कर महागठबंधन का हिस्सा बने थे तो उन्होंने कहा था कि यदि समूचा विपक्ष एक हो जाए तो भाजपा को सौ सीटों के भीतर समेटा जा सकता है। लगता है कि अब दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे के हिसाब से तैयारी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में बुधवार को नीतीश कुमार ने नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात की, यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है और यह विपक्षी एकता के लिए धुरी साबित हो सकती है। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे। बैठक के बाद नीतीश, खड़गे और राहुल ने मीडिया से भी बात की।
खड़गे ने नीतीश के साथ हुई इस बैठक को ऐतिहासिक बताया। खड़गे ने कहा कि हमें विपक्ष को एकजुट करके लड़ना है। हम सभी विपक्ष को एकजुट करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस दिशा में यह बैठक काफी अहम रही। खड़गे ने कहा कि सभी पार्टियों को एकजुट करना है और सभी को एकजुट करके लड़ना है। नीताश, राहुल और तेजस्वी सब एक साथ इसी राह पर काम कर रहे हैं। नीतीश कुमार ने कहा कि हम लोगों ने एकजुट होने के मुद्दे पर चर्चा की। पूरे देश में और भी पार्टियां हमारे साथ आएंगी। राहुल गांधी ने कहा कि यह विपक्ष को एक करने का ऐतिहासिक कदम है। देश में विचारधारा की लड़ाई चल रही है। संस्थानों को बचाने की लड़ाई चल रही है। हम उसके खिलाफ एक साथ होंगे। उसी की दिशा में ये अहम कदम उठाया गया है। इससे पहले नीतीश कुमार मंगलवार शाम को लालू यादव की बेटी मीसा भारती के घर पर पहुंचे। यहां उन्होंने लालू यादव से मुलाकात की।
समझा जाता है कि लालू और नीतीश के बीच मौजूदा राजनीतिक हालातों पर चर्चा हुई। उल्लेखनीय है कि नीतीश तेजस्वी यादव से दिल्ली में ऐसे वक्त पर मुलाकात करने पहुंचे, जब एक दिन पहले ही सीबीआई ने उनसे लैंड फॉर जॉब स्कैम में पूछताछ की है। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा काफी अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। नीतीश कई बार 2024 लोकसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों को एक साथ आने की अपील कर चुके हैं। नीतीश ने फरवरी में कहा था कि अगर सभी पार्टियां मिलकर 2024 का चुनाव लड़ती हैं, तो बीजेपी 100 सीटों पर सिमट जाएगी।
महागठबंधन की रैली को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा था कि कांग्रेस को इसे लेकर जल्द फैसला करना पड़ेगा। इससे पहले नीतीश पिछले साल सितंबर में दिल्ली के दौरे पर पहुंचे थे। तब उन्होंने एनसीपी नेता शरद पवार, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, डी. राजा, सीताराम येचुरी और अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। बिहार में अभी नीतीश के नेतृत्व में गठबंधन सरकार है। इसमें जदयू, राजद, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां शामिल हैं। नीतीश कुमार ज्यादा से ज्यादा पार्टियों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि नीतीश की पहल बहुत अच्छी है। अपोजिशन को एक करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। विचारधारा की लड़ाई को लड़ेंगे। देश पर आक्रमण के खिलाफ लड़ेंगे। 2024 आम चुनाव से पहले हो रही इस मुलाकात के बाद कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार यूपीए के संयोजक बनाए जा सकते हैं। कुल मिलाकर विपक्ष की एकता के लिए नीतीश कुमार का प्रयास काफी सार्थक है, जो विपक्षी एकता के लिए धुरी बन सकता है।