नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली में मुकरबा चौक से सिंघू सीमा तक आठ लेन के राजमार्ग का निर्माण करते समय पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को दो करोड़ रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अधिकरण इससे जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें दावा किया गया था कि खामपुर गांव और अन्य हिस्सों में पानी का छिड़काव नहीं करने और प्रतिपूरक वनीकरण के सिद्धांतों का पालन नहीं करने व हरित राजमार्ग (वृक्षारोपण, प्रतिरोपण, सौंदर्ईकरण और रखरखाव) नीति का अनुपालन नहीं करने के कारण धूल पैदा हो रही है।
अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की पीठ ने पिछले साल नवंबर में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राष्ट्रीय राजधानी के पर्यावरण विभाग के निदेशक से इस मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी। पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी के साथ विशेषज्ञ सदस्य ये सेंथिल वेल भी शामिल थे। जिन्होंने कहा कि संयुक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, लेकिन अवसर प्रदान किए जाने के बावजूद एनएचएआई अपनी टिप्पणियों और सिफारिशों का खंडन करने में विफल रहा।
पीठ ने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण मानदंड सतत विकास का एक आवश्यक घटक है और धूल पैदा करने वाली किसी भी गतिविधि के साथ धूल नियंत्रण के उपाय होने चाहिए जो नहीं उठाए गए हैं। पीठ ने कहा कि उपचारात्मक कार्रवाई तेजी से की जानी चाहिए। इसके साथ ही पूर्व के उल्लंघन के लिए एनएचएआई को दो करोड़ रुपए का मुआवजा देना होगा। इसे एक महीने के भीतर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) और हरियाणा के वन बल के प्रमुख के पास जमा करना होगा।