रामनवमी के मौके पर बिहार सहित कई राज्यों में हिंसा की घटनाएं घटीं। बिहार में हालात इस कदर खराब है कि कई जिलों में इंटरनेट सर्विस भी रोकनी और धारा 144 लगानी पड़ी है। कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है और गृह मंत्री अमित शाह को अपना सासाराम जाने का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। रामनवमी पर हिंसा की आशंका पहले से थी। कारण कि पिछले कई सालों से रामनवमी के मौके पर हिंसा की खबरे आती रही हैं। इससे पूर्व रामनवमी का त्योहार शांतिपूर्वक गुजर जाता था। कहीं-कहीं, कभी-कभार कुछ तनाव की खबरें आती थीं, लेकिन इस बार जो भी हुआ है, वह निंदनीय है और इस पर हर हाल में अंकुश की जरूरत है। बिहार में इससे पहले कभी ना कभी दंगे की स्थिति बन जाती थी।
इस बार जहां- जहां घटनाएं घटीं हैं, वहां पहले भी दंगे हो चुके हैं। वो निश्चित रूप से संवेदनशील इलाके रहे हैं, लेकिन इस बार रामनवमी के अवसर पर पुलिस प्रशासन की तैयारी पुख्ता नहीं थी,जो घटनाएं घटीं, जो दृश्य सामने आए, उनसे स्पष्ट हो गया कि इसे रोका जा सकता था, यदि खुफिया जानकारी सही मिली होती। भाजपा नेता गिरिराज सिंह कह रहे हैं कि इस हिंसा के लिए नीतीश सरकार जिम्मेदार है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कह रहे हैं कि कानून व्यवस्था बिल्कुल ठीक है, लेकिन जरूर किसी ने घिचपिच की है। बिहार भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी का कहना है कि सासाराम में अमित शाह की जो सभा होने वाली थी, उसको रोकने के लिए राज्य सरकार के इशारे पर सत्तारूढ़ दलों के लोगों ने इस हिंसा को उकसाया। स्थिति ऐसी बना दी कि वहां पर धारा 144 लागू करने की जरूरत आ जाए और सभा न हो। इसी सिलसिले में भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से भी भेंट की।
महामहिम को ज्ञापन भी सौंपा। भाजपा का कहना है कि यहां कानून-व्यवस्था की हालत लगातार बुरी होती जा रही है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में भाजपा धर्म की राजनीति कर रही है तो महागठबंधन जातिगत आधार पर राजनीति कर रहा है। भाजपा चाहती है कि मतदाताओं का बिखराव जाति के आधार पर न हो, परंतु उसकी प्रबल इच्छा है कि मतदाता धर्म के नाम पर एकजुट जरूर हों, जिसका फायदा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को मिल सके। पिछले दिनों रामायण में कुछ विवादास्पद अंश को लेकर सत्ताधारी महागठबंधन के मंत्री की तरफ से बातें आईं। जो कुछ बयान आए, उनसे यह साफ दिखने लगा कि महागठबंधन को चिंता है कि कहीं बिहार में धर्म के नाम पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण न हो जाए। जातीय पहलू को ज्यादा सबल करने और उसको उभारने के लिए कुछ बयान भी दिए गए। हम कह सकते हैं कि ये कोशिश है, जो दोनों तरफ से चल रही है। लगता है कि दोनों आने वाले लोकसभा चुनाव को अपने-अपने हक में करने की तैयारी कर रहे हैं । राजनीतिक पार्टियों को हक है कि वे अपने-अपने पक्ष में माहौल तैयार करें, परंतु धर्म और जाति के आधार पर लोगों के बीच विभेद पैदा कर चुनाव जीतना कहां तक उचित है?
ऐसा करना मानवता के खिलाफ है। फिर भी ऐसा करना राजनीति का हिस्सा बन गया है और राजनेता गाहे-बगाहे अपने राजनीतिक हित के लिए उपरोक्त आशय की घटना को अंजाम दिलाने से भी पीछे नहीं रहते हैं। हमारे कथित मसीहा समाज को बांटने के लिए क्या- क्या कर सकते हैं उसका अंदाज उनके घृणास्पद बयानों से लगाया जा सकता है। भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोतम कहा जाता है और उन्होंने शासन का एक बेहतर मॉडल पेश किया था,जिसे रामराज कहा जाता है, जिसकी परिकल्पना खुद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने की थी जिसमें सभी के लिए न्याय था, परंतु आज के शासकों से न्याय और इंसाफ की उम्मीद नहीं की जा सकती,भले ही वे बार- बार रामराज लाने की बातें करते हैं।