असम में विधानसभाओं एवं संसदीय क्षेत्रों का फिर से सीमांकन करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस प्रक्रिया के शुरू करने से पहले मांग की जा रही थी कि चुनाव आयोग को संबंधित पक्षों के विचार सुनने के बाद परिसीमन प्रक्रिया पर आगे बढ़ना चाहिए। इस तरह की मांग को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग की टीम ने 27 मार्च से लेकर 29 मार्च तक राज्य के नौ राजनीतिक पार्टियों एवं 60 सामाजिक संगठनों के साथ बैठक कर उनकी सलाह को सुना। अखिल असम छात्र संघ (आसू) ने भी अपने विचार रखे। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के नेतृत्व में पहुंची तीन सदस्यीय टीम ने सभी पक्षों को ध्यान से सुना तथा असम की जनता को आश्वासन दिया है कि यहां के सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक तानाबाना का पूरी तरह ख्याल रखा जाएगा। राजीव कुमार के साथ ही दोनों चुनाव आयुक्त अनूपचंद पांडे एवं अरुण गोयल भी राज्य के दौरे पर हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने सभी पक्षों को आश्वस्त किया है कि परिसीमन का काम किसी के निर्देश पर नहीं होगा। प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह पारदर्शिता बरती जाएगी। कांग्रेस सहित कुछ पक्षों ने ऐसा आरोप लगाया था कि परिसीमन प्रक्रिया भाजपा के हितों को ध्यान में रखकर की जा रही है। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि परिसीमन प्रक्रिया के दौरान राज्य के संसदीय एवं विधानसभा क्षेत्रों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा। पहले की ही तरह राज्य में 14 संसदीय क्षेत्र एवं 126 विधानसभा क्षेत्र बरकरार रहेंगे। परिसीमन प्रक्रिया जनता की आकांक्षा, भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक सुविधा एवं आवागमन को ध्यान में रखकर कुछ क्षेत्रों की अदला-बदली हो सकती है। कांग्रेस शुरू से ही इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस ने पिछले 4 मार्च को ही मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार से भेंट कर इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा था। कांग्रेस ने इस बार गुवाहाटी में चुनाव आयोग के सदस्यों से यह कहकर मिलने से इनकार कर दिया है कि हमलोग अपना विचार पहले ही दे चुके हैं। परिसीमन प्रक्रिया 2001 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। इससे पहले 1976 में परिसीमन का काम हुआ था, जिसमें 1971 की जनगणना के आंकड़े के आधार पर काम हुआ था।

राष्ट्रीय परिसीमन की प्रक्रिया 2026 में होने वाली है, जिसमें संसदीय एवं विधानसभा की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। मालूम हो कि चुनाव आयोग अंतिम सूची प्रकाशित करने से पहले प्रारूप मसौदा प्रकाशित करेगा। उसके बाद संबंधित पक्ष फिर इस मामले में अपना विचार रख सकते हैं। चुनाव आयोग की टीम उन लोगों के विचार सुनने के लिए फिर असम का दौरा करेगी। चुनाव आयोग चाहता है कि परिसीमन प्रक्रिया के दौरान सभी पक्षों को संतुष्ट करने का प्रयास किया जाए ताकि उसपर पक्षपात करने का आरोप नहीं लगे। पिछले कुछ समय से कांग्रेस सहित कुछ राजनीतिक पार्टियां चुनाव आयोग की नीयत पर ही सवाल उठा रही हंै। उनका आरोप है कि आयोग नरेन्द्र मोदी सरकार के इशारे पर काम कर रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि आगे से मुख्य चुनाव आयुक्त एवं दोनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति आयोग करेगी, जिसके प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता सदस्य होंगे। उम्मीद है कि चुनाव आयोग की पहल से सभी संबद्ध पक्ष परिसीमन प्रक्रिया से संतुष्ट होंगे।