गुवाहाटी: पुण्य कभी छोटा या बड़ा नहीं होता। सेवा का छोटा काम अगर मन से किया जाता है तो उसका भी बड़ा फल मिलता है। समग्र उत्तर-पूर्वी भारत को विकलांगता के अभिशाप से मुक्त करने के महान उद्देश्य से विशिष्ट समाजसेवी शुभकरण बाफना द्वारा गुवाहाटी के अमीनगांव इलाके में स्थापित तोलाराम बाफना कृृत्रिम पैर व केलिपर केंद्र के 32वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए असम के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उक्त उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अगर आप अपने मकान की छत पर पानी का बर्तन रखते हैं तो उसमें से एक चोंच पानी पीकर तृप्त हुई चिडिय़ा भी जी भरकर आशीर्वाद देती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में कुछ न कुछ सेवा का काम जरूर करना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि जाति, पंथ या धर्म से ऊपर उठकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जितना संभव हो उतना योगदान देने का प्रयास करें। शुभकरण बाफना की प्रशंसा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आपके पिता स्व. तोलाराम बाफना भी इस बात के लिए श्रद्धा के पात्र हैं, जो उन्होंने आपको सेवा के संस्कार दिए। अगर हर मां-बाप अपने बच्चों को तोलारामजी सरीखे संस्कार दें तो हमारा समाज काफी विकसित हो सकता है। राज्यपाल कटारिया ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को जितनी शारीरिक पीड़ा होती है, उससे ज्यादा उन्हें विकलांग कहने से होती थी। सौभाग्य से प्रधानमंत्री जी ने शारीरिक रुप से अक्षम लोगों को विकलांग के बजाय दिव्यांग कहकर संबोधित करने का आह्वान कर उन्हें मानसिक विकलांगता से छुटकारा दिला दिया। यहां राज्य सरकार दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए पूरी तरह से समर्पित है।

इस समुदाय की जरूरतों पर बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदान करना उन्हें एक सम्मानित जीवन जीने में मदद करने के लिए आवश्यक समर्थन और संसाधन देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। राज्यपाल ने आगे कहा कि धन-दौलत से आदमी बड़ा नहीं होता, सेवा के कार्य करने वाला ही बड़ा होता है। इसलिए हमें जीवन में कुछ न कुछ सेवा के कार्य जरूर करने चाहिए। कार्यक्रम का संचालन बाफना केंद्र के प्रचार सचिव राजकुमार झांझरी ने किया। कार्यक्रम के पूर्व राज्यपाल ने केंद्र में उपस्थित दिव्यांगों से विचार-विमर्श कर उनकी दु:ख तकलीफों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कामरुप (ग्रामीण) जिला उपायुक्त कीर्ति जोल्ली ने कहा कि शुभकरण बाफना ने अमीनगांव को चिकित्सा का हब बनाने में जो योगदान दिया है, उसकी जितनी तारीफ की जाए, कम है।

उन्होंने कहा कि बाफना की सेवा भावना से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। बाफना केंद्र के संचालक शुभकरण बाफना ने कहा कि हमने जयपुर से अत्यधिक वेतन देकर तकनीशियनों को बुलवाकर केंद्र की स्थापना की और बाद में स्थानीय युवकों को कृत्रिम पैर निर्माण की तकनीक का प्रशिक्षण दिया। तभी से यह केंद्र पूर्वांचल के लोगों की सेवा कर रहा है। श्री बाफना ने कहा कि केंद्र द्वारा अब तक 10224 दिव्यांगों को अत्याधुनिक कृृत्रिम जयपुरी पैर नि:शुल्क प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं।