संसद का बजट सत्र हंगामे के कारण लगातार बाधित हो रहा है। 13 मार्च से शुरू हुआ दूसरा सत्र भी सरकार और विपक्ष के टकराव की भेंट चढ़ रहा है। इसका नतीजा यह हुआ है कि संसद के दोनों सदनों का कामकाज पूरी तरह बाधित हो रहा है। विपक्षी दल अडाणी मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग कर रहे हैं, वहीं भाजपा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा ब्रिटेन में भारतीय लोकतंत्र पर की गई टिप्पणी को लेकर उनसे माफी मांगने की मांग कर रही है। पिछले कुछ दिनों से चल रहे हंगामे ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब सूरत की एक कोर्ट ने मानहानि के मामले में राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई। सजा का ऐलान होने के दो दिन बाद राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता भी चली गई। अब उनको एमपी आवास खाली करने का भी नोटिस मिल चुका है।
न्यायालय के इस फैसले के बाद अचानक सियासत और गर्म हो गई है। अब कांग्रेस संसद के भीतर तथा बाहर और ज्यादा आक्रामक हो गई है। विपक्ष कोर्ट के इस फैसले के लिए मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है। दूसरे विपक्षी दल भी अब इस मुद्दे पर लामबंद होने लगे हैं। कई विपक्षी दलों के नेता पहले से ही सीबीआई और ईडी के जाल में फंस चुके हैं। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, सपा, बीआरएस पार्टी के कई नेता और मंत्री सीबीआई के शिकंजे में हैं। दिल्ली के उपमुख्यंत्री मनीष सिसोदिया भी अभी जेल में हैं। कांग्रेस इसका फायदा उठाते हुए सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रही है, ताकि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी एकता मजबूत हो। अनेक विपक्षी दलों ने पहले से ही मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। राहुल गांधी प्रकरण के बाद टीएमसी जैसे दल भी अब इस मुहिम में शामिल हो गए हैं।
कांग्रेस सूरत कोर्ट के फैसले के खिलाफ ऊपरी कोर्ट में अपील करने से पहले अपनी राजनीतिक जमीन और मजबूत करना चाहती है। वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल मोदी सरकार को घेरने में लगी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी इसी रणनीति का एक हिस्सा है। यह सबको मालूम है कि लोकसभा में भाजपा का बहुमत है, ऐसी स्थिति में अविश्वास प्रस्ताव का कोई मतलब नहीं है। यह प्रस्ताव तभी लाया जा सकेगा जब संसद का कामकाज सुचारू रूप से चले। जब प्रश्नकाल और शून्यकाल सामान्य ढंग से नहीं चल रहा है, तो संसद का काम कैसे होगा? इधर मोदी सरकार ने भी विपक्ष की मुहिम के खिलाफ कमर कस ली है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार विपक्ष के भ्रष्टाचारी अभियान के खिलाफ नहीं झुकेगी। इसका मतलब साफ है कि सीबीआई और ईडी का अभियान जारी रहेगा। चुनाव आयोग ने कर्नाटक विधानसभा, पंजाब के जालंधर लोस सीट एवं तीन राज्यों के चार विधानसभा सीटों पर मतदान की तिथि का ऐलान कर दिया है, किंतु केरल की वायनाड सीट के उपचुनाव की घोषणा नहीं हुई है।
चुनाव आयोग का तर्क है कि अदालत ने राहुल गांधी को ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया है। यह अवधि खत्म होने के बाद ही इस सीट के लिए चुनाव की घोषणा की जाएगी। भारत के संसद में चल रहे गतिरोध की चर्चा अमरीका एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ तक है। एक प्रश्न के उत्तर में अमरीकी सरकार के उपप्रवक्ता ने कहा कि हमारी नजर राहुल गांधी से संबंधित कोर्ट के फैसले एवं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर है। अमरीका को पहले अपने गिरेबां में झांक कर देखना चाहिए, जहां अपराधी सरेआम स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग कर बच्चों को मार रहे हैं। अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अमरीका में गन कल्चर के प्रति बेबस नजर आ रहे हैं। भारतीय लोकतंत्र इतना मजबूत है कि छोटी-मोटी घटनाओं से प्रभावित नहीं होगा। सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के लोग ही अपनी समस्याओं का हल खोज लेंगे। इसमें विदेशी हस्तक्षेप की जरुरत नहीं है। सरकार तथा विपक्ष दोनों का दायित्व है कि संसद का कामकाज सुचारू रूप से चलाना सुनिश्चित करें।