योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार गठित होने के बाद वहां के माफियाओं की शामत आ गई है। बुलडोजर बाबा के नाम से विख्यात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने राज्य में सक्रिय माफियाओं तथा अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। इसका नतीजा यह हुआ है कि माफियाओं के मन में प्रशासन का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि वे अपनी जान को असुरक्षित समझ रहे हैं। योगी ने अपने पुलिस प्रशासन को अपराधियों से निपटने के लिए खुली छूट दे रखी है।
अपराधियों के खिलाफ हो रहे एनकाउंटर एवं उनकी संपत्ति को बर्बाद करने के लिए चलाए जा रहे बुल्डोजर इसके जीते-जागते उदाहरण हैं। योगी ने विधानसभा के पटल से स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी सरकार माफियाओं को मिट्टी में मिला देगी। कुछ साल पहले कानपुर (देहात) के बिकरू गांव के माफिया विकास दुबे तथा उनके साथियों को पुलिस ने एनकाउंटर में ही मौत के घाट उतार दिया था। ये सभी पुलिस पार्टी पर हमले में शामिल थे। अतीक अहमद तथा मुख्तार अंसारी जैसे राजनीतिक पहुंच वाले माफियाओं के खिलाफ प्रशासन नतमस्तक था। इन दोनों के गिरोह के खिलाफ किसी को बोलने की हिम्मत नहीं थी। इसका उदाहरण यह है कि अतीक अहमद जैसे माफिया के खिलाफ पिछले 44 वर्षों के दौरान सौ से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, ङ्क्षकतु पहली बार उमेश पाल अपहरण मामले में कोर्ट का चाबुक चला है।
कोर्ट ने माफिया अतीक अहमद एवं उनके दो गुर्गों दिनेश पासी एवं सौलत हनीफ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अतीक के भाई अशरफ एवं छह अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। मालूम हो कि 28 फरवरी 2006 को विधायक राजू पाल पर जानलेवा हमला हुआ जिसमें उनकी मौत हो गई। इस घटना के प्रमुख गवाह उमेश पाल का अतीक के निर्देश पर उनके गुर्गों ने अपहरण कर लिया। 1 मार्च 2006 को उमेश पाल ने खौफ में आकर अतीक अहमद के पक्ष में कोर्ट में हलफनामा दायर किया। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश में मायावती के नेतृत्व में बसपा की सरकार बनने के बाद ही अतीक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। सत्ता परिवर्तन के बाद उमेश पाल ने भी अतीक के खिलाफ केस की पैरवी शुरू कर दी। 17 वर्ष के संघर्ष के बाद उमेश पाल को न्याय तो मिला, ङ्क्षकतु माफियाओं ने कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के पहले ही उमेश पाल की हत्या कर दी। अभी भी अतीक के खिलाफ 52 से ज्यादा मामले विभिन्न कोर्टों में लंबित हैं। जैसे-जैसे अतीक का आतंक बढ़ता गया, उसका राजनीतिक कद भी बढ़ता गया। सर्वप्रथम 1989 में इलाहाबाद पश्चिम से वह विधायक बना।
अभी तक वह पांच बार विधायक एवं एक बार सांसद रह चुका है। उसके खिलाफ एनएसए, गैंगस्टर एवं गुंडा एक्ट के तहत अनेक मामले दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद ऐसे तत्वों को राजनीतिक दलों द्वारा तरजीह दिया जाना यह साबित करता है कि राजनीतिज्ञों एवं अपराधियों के बीच कितनी गहरी साठगांठ है। राजनीतिक दल ऐसे अपराधियों को टिकट देकर जीत की गारंटी समझते हैं। योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद ऐसे माफियाओं पर हथौड़ा चलाना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि अतीक जैसे माफिया अपने को जेल में ही सुरक्षित समझने लगे हैं। पुलिस के सामने आने से ही उनको एनकाउंटर का डर सताने लगा है। अतीक के मामले में एक अच्छी शुरुआत हुई है, हालांकि उमेश पाल का परिवार फांसी की सजा चाहता है।