इस वर्ष छह राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसमें राजस्थान भी शामिल है। इससे पहले त्रिपुरा, मेघालय एवं नगालैंड विधानसभा के चुनाव हो चुके हैं, जिसमें भाजपा गठबंधन को जीत मिली है। राजस्थान के साथ-साथ मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मिजोरम एवं तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होगा। राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक एवं छत्तीसगढ़ पर भाजपा की विशेष नजर है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राजस्थान से सभी लोकसभा सीटें जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया था। भाजपा विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल कर लोकसभा चुनाव के लिए सुगम रास्ता बनाना चाहती है। राजस्थान की राजनीति भाजपा और कांग्रेस के बीच झूलती रहती है।

वर्तमान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार है। राजस्थानी कांग्रेस अशोक गहलोत एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच बंटी हुई है। दोनों के बीच खटास कई मौके पर सार्वजनिक हो चुकी है। मजबूत स्थिति के कारण कांग्रेस हाईकमान अशोक गहलोत को वहां से हटाने की हिम्मत नहीं कर रही। भाजपा भी गुटबाजी से अछूता नहीं है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एवं निवर्तमान अध्यक्ष सतीश पुनिया के बीच खींचतान चलती रही है। राजस्थान भाजपा के नेता गुलाबचंद कटारिया के असम का राज्यपाल बनने के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी खाली है। विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ही उनकी भूमिका निभा रहे हैं।

विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने चित्तौरगढ़ से सांसद सीपी जोशी को राजस्थान भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त कर ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। हाल ही में जयपुर में ब्राह्मण महापंचायत का आयोजन किया गया था, जिसमें भाजपा-कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने शिरकत की थी। उस बैठक में ब्राह्मण समाज से मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग की गई थी। पिछले कई वर्षों से भाजपा तथा कांग्रेस में इस समुदाय का प्रतिनिधित्व बहुत कम रहा है। भाजपा ने नौ साल बाद ब्राह्मण समुदाय के किसी दिग्गज नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। कांग्रेस में भी पिछले 12 साल से किसी ब्राह्मण नेता को मौका नहीं मिला है। राज्य में अभी 17 ब्राह्मण विधायक, दो सांसद एवं दो कैबिनेट मंत्री हैं। भाजपा ने सीपी जोशी को अध्यक्ष का पद देकर वसुंधरा एवं पुनिया दोनों गुटों को साधने का प्रयास किया है। ऐसा माना जा रहा है कि सीपी जोशी दोनों में से किसी गुट से संबद्ध नहीं हैं।

वर्ष 2023 में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है, राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठन भी सक्रिय होते जा रहे हैं। नेतागण विभिन्न जाति एवं समुदाय के बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए आवाज बुलंद कर अपने को हितैषी साबित करने में लगे हैं। पिछले 5 मार्च को जयपुर में जाट महाकुंभ का भी आयोजन किया गया था। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के शपथ ग्रहण को ऐतिहासिक बनाकर अपना शक्ति प्रदर्शन करना चाहती है। अगर लोकसभा चुनाव में भाजपा को बेहतर प्रदर्शन करना है तो उसे राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी सत्ता तक पहुंचना होगा। इसके लिए भाजपा को अशोक गहलोत के विजय रथ को हर हालत में रोकना होगा जो आसान काम नहीं है।