अमरीका सहित कई पश्चिमी देश भारत का शुभचिंतक होने का दावा करते हैं, किंतु भीतर ही भीतर साजिश रचने से बाज नहीं आते। यही चीज खालिस्तान आंदोलन के मामले में देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान का भारत के खिलाफ षड्यंत्र तो जगजाहिर है। आर्थिक तंगी से गुजर रहा पाकिस्तान अभी भी भारत के खिलाफ साजिश रचने से पीछे नहीं हट रहा है। दिवालिया होने के रास्ते पर चल रहे पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई खालिस्तानी उग्रवादियों को हवा देने में लगी हुई है। आईएसआई भारत को तोड़ने की साजिश में लगा हुआ है। लेकिन भारत का दोस्त बताने वाले अमरीका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया एवं कनाडा जैसे देशों में भारत विरोधी संगठन सिख फॉर जस्टिस को अपनी गतिविधियां चलाने की खुली छूट देना निश्चित रूप से संदेह पैदा करता है।

खालिस्तानियों के इशारे पर काम कर रहे वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह तथा उनके समर्थकों के खिलाफ भारत में शुरू की गई कार्रवाई के खिलाफ भारत ने ब्रिटेन सहित कुछ देशों को आगाह किया था कि उनके यहां खालिस्तानी समर्थक हंगामा कर सकते हैं। भारत द्वारा ब्रिटेन को जानकारी देने के बावजूद लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के सामने सिख फॉर जस्टिस के समर्थकों ने इकट्ठा होकर नारेबाजी की एवं भारतीय तिरंगे को हटाकर खालिस्तान का झंडा लगा दिया। आश्चर्य की बात यह है कि ब्रिटेन की सरकार द्वारा भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया था। ऐसा लगता है कि अलगाववादियों को हंगामा करने की पूरी छूट दे दी गई थी। यही हाल अमरीका के सेनफ्रांसिस्को स्थित वाणिज्य दूतावास की भी रही। यहां भी खालिस्तान समर्थकों ने भारत के खिलाफ नारेबाजी की एवं भारतीय तिरंगे का अपमान किया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत स्थित ब्रिटेन के उच्चायुक्त को तलब कर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

लंदन प्रशासन उस वक्त हरकत में आया जब भारत ने नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश उच्चायोग के सामने दी गई सुरक्षा को पूरी तरह हटा लिया। भारत ने ब्रिटिश उच्चायुक्त के सामने लगे बेरिकेट्स को हटा लिया। भारत के एक्शन के बाद ब्रिटेन की सरकार ने भारतीय उच्चायोग के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा-व्यवस्था उपलब्ध करवा दी। ब्रिटेन के साथ भारत की जवाबी कार्रवाई को देखकर अमरीका भी हरकत में आ गया। वहां भी भारतीय दूतावास के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, ताकि खालिस्तानी समर्थक कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाए। भारत के कड़े अंदाज को देखते हुए इन देशों को संदेह है कि कहीं भारत उनके साथ होने वाले विभिन्न व्यापारिक डीलों को कहीं ठंडे बस्ते में न डाल दे। इसी तरह आस्ट्रेलिया में भी सिख फॉर जस्टिस के समर्थकों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया गया है तथा हिंदुओं के धर्मस्थल मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। वहां भी प्रशासन इस मामले में मूकदर्शक बना रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत यात्रा के दौरान आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री से इस मामले में कड़ा विरोध व्यक्त किया है। कनाडा तो खालिस्तानियों का गढ़ रहा है। वहां कई खालिस्तानी नेता डेरा डालकर भारत विरोधी गतिविधियां चला रहे हैं। वहां की सरकार का खालिस्तानियों के प्रति हमेशा नरम रुख रहा है।

कनाडा में भी उन लोगों ने कई मंदिरों पर हमला कर तोड़फोड़ की है। ये सभी घटनाएं यह दर्शाती है कि पश्चिमी देश भले ही भारत का हितैषी होने का दावा करते हों, किंतु भीतर ही भीतर भारत की प्रगति से जल रहे हैं। इन देशों का दोगलापन पूरी तरह उजागर हो गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के मसले पर भारत हमेशा रूस का समर्थन कर रहा है, जिससे ये देश भारत से जलते हैं। यही कारण है कि पश्चिमी देश भारत को पूरा सहयोग नहीं कर रहे हैं। पश्चिमी देशों में भारत के खिलाफ हो रही घटनाएं यह साबित करने के लिए काफी हैं कि पश्चिमी देश भारत के लिए कभी भी रूस का स्थान नहीं ले सकते। भारत को इन साजिशों के प्रति सावधान रहते हुए करारा जवाब भी देना होगा।