पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद पृथक खालिस्तान बनाने की फिर से साजिश शुरू हो गई है। वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह के नेतृत्व में खालिस्तान समर्थकों ने पिछले कुछ दिनों से पंजाब में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। अमृतपाल ने अलग से खालसा फोर्स की भर्ती भी शुरू कर दी थी। पंजाब के अजनाला थाने में बंद लवप्रीत को छुड़ाने के लिए जिस तरह अमृतपाल के समर्थकों ने धर्म की आड़ लेकर हंगामा किया उसके बाद केंद्र को चौकन्ना होना स्वाभाविक है। स्थिति काबू से बाहर होते देख भगवंत मान सरकार भी अपनी इज्जत बचाने के लिए हरकत में आई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री की बैठक यह बताता है कि पंजाब की स्थिति गंभीर हो गई थी।
पंजाब पुलिस अब हरकत में आ गई है। पुलिस ने अब तक अमृतपाल के चाचा हरजीत सिंह सहित सौ से ज्यादा अमृतपाल के समर्थकों को गिरफ्तार किया है। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि पंजाब पुलिस द्वारा अमृतपाल के काफिले को घेर लेने के बावजूद वह कैसे फरार हो गया? ऐसा लगता है कि पंजाब पुलिस का एक तबका उसकी मदद कर रहा है। अमृतपाल ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि उसे पंजाब पुलिस से कोई परेशानी नहीं है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी पंजाब सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा है कि राज्य में 80 हजार पुलिस फोर्स होने के बावजूद अमृतपाल कैसे फरार हो गया? हाईकोर्ट ने खुफिया एजेंसियों की विफलता पर भी सवाल उठाया है। अमृतपाल वर्ष 2022 में पंजाब आया था तथा उसके बाद से ही अपनी गतिविधियां शुरू कर दी थी।
पिछले कुछ महीनों से वह खालिस्तान का पोस्टर ब्वॉय बन चुका था। पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के इशारे पर काम करने लगा था। बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे आतंकी संगठन के दिशा-निर्देश में पंजाब में हथियारों को जमा करने एवं युवकों को बरगलाने का काम शुरू किया था। पुलिस की छापेमारी में बहुत से हथियार जब्त किये गए हैं। ऐसी खबर है कि वह युवकों को भर्ती कर मानव बम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर चुका था। आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद पुलिस प्रशासन भी इसके गतिविधियों के प्रति नरम रुख अपनाए हुए था। अंतर्राष्ट्रीय आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के इशारे पर अमृतपाल काम कर रहा था। पन्नू और आईएसआई का संबंध जगजाहिर है। खालिस्तान समर्थकों ने जो नक्शा जारी किया है उसमें पाकिस्तान के हिस्से वाले पंजाब का कहीं भी जिक्र नहीं है।
यह सबको मालूम है कि पंजाब के तत्कालीन राजा रंजीत सिंह ने अपनी राजधानी लाहौर में बनाई थी एवं सिख धर्मावलंबियों का पवित्र ननकाना साहिब भी पाकिस्तान में ही है। इन क्षेत्रों को खालिस्तान के क्षेत्र में शामिल नहीं करना यह दर्शाता है कि पन्नू समर्थक आईएसआई को नाराज करना नहीं चाहते। ऐसी आशंका है कि अमृतपाल पाकिस्तान भी भाग सकता है। कुल मिलाकर पंजाब की विस्फोटक स्थिति को काबू में करने के लिए केंद्र और पंजाब सरकार को मिलकर सख्त कदम उठाने की जरुरत है। खुशी की बात है यह कि पंजाब की देशभक्त जनता इस तरह के राष्ट्र विरोधी कामों का सड़क पर उतर कर विरोध कर रही है।