पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी को लेकर पिछले दो दिनों से वहां हंगामा मचा हुआ था। पुलिस और इमरान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं के बीच कई जगहों पर भिड़ंत भी हो चुकी है। पीटीआई कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह पर तोड़-फोड़ की है तथा वाहनों को आग के हवाले किया है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर 16 मार्च की सुबह 10  बजे तक रोक लगाई है। हाईकोर्ट 16 मार्च को इमरान द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करेगा। इधर पाकिस्तान में चल रहे क्रिकेट प्रीमियर लीग को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने गिरफ्तारी को टालने का निर्णय लिया है। प्रशासन को अंदेशा है कि गिरफ्तारी के बाद हंगामे से क्रिकेट मैच में बाधा पहुंच सकती है।

हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक इमरान पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती रहेगी। इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री की तरफ से इस्लामाबाद हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की गई है। इमरान का आरोप है कि शाहबाज शरीफ सरकार उनको गिरफ्तार कर जेल भेजने के बहाने मरवाना चाहती है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से अपनी जान की खतरा को लेकर भावनात्मक अपील की है। उनकी इस अपील के बाद पीटीआई कार्यकर्ता सड़क पर उतर गए हैं। मालूम हो कि कोर्ट ने तोशखाना मामले को लेकर इमरान के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इमरान पर आरोप है कि प्रधानमंत्री को मिले कीमती उपहारों को बेचकर पूर्व प्रधानमंत्री उक्त धनराशि का गबन किये हैं। इसके अलावा इमरान पर न्यायाधीश को धमकी देने का भी आरोप है। शाहबाज सरकार के खराब प्रदर्शन के खिलाफ पहले से ही जनता में रोष है। ऐसी स्थिति में इमरान को पाकिस्तानी जनता का पूरा समर्थन मिल रहा है।

ऐसा कहा जाता है कि इमरान की गिरफ्तारी की पहल के पीछे चीन का हाथ है। ऐसा आरोप है कि हाल ही में इमरान की अमरीकी अधिकारियों के साथ एक बैठक हुई है, जिसमें इमरान ने अमरीका के खिलाफ पहले दिये गए अपने बयान से पीछे हटने का निर्णय लिया है। इमरान ने अमरीकी अधिकारियों के समक्ष यह भी स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति के लिए चीन की बीआरआई परियोजना जिम्मेवार है। बीआरआई के कारण ही पाकिस्तान कर्जजाल में फंसा हुआ है। अगर पाकिस्तानी प्रशासन इमरान को गिरफ्तार करती है तो देश में खून-खराबा होना निश्चित है। आर्थिक  तंगी और महंगाई के कारण वहां की जनता पहले ही त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रही है। पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते लगातार बिगड़ रहे हैं। सीमा पर तालिबानी लड़ाके पाकिस्तानी सीमा पर हमले कर रहे हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान लगातार पाकिस्तान में हमला कर वहां की शासन-व्यवस्था को चुनौती दे रहा है। पाकिस्तानी सरकार माकूल जवाब देने से बच रही है। कुल मिलाकर पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति डांवाडोल है। एक चिंगारी भी बड़ी घटना का रूप ले सकती है।

वहां की स्थिति ऐसी है कि आज कोई देश उसको मदद करने को तैयार नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष ने एक के बाद एक शर्त थोपकर पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया है। आतंक के जनक पाकिस्तान को अपना मुंह छिपाना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद पाकिस्तान कश्मीर का राग अलापना बंद नहीं कर रहा है। संयुक्तराष्ट्र संघ के मंच से भी पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कश्मीर में मानवाधिकार के उल्लंघन का मुद्दा उठाया था। भारत ने करारा जवाब देकर उसकी बोलती बंद कर दी। सबको मालूम है कि पाकिस्तान में वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों की स्थिति क्या है? वहां का प्रशासन भी अल्पसंख्यकों की कोई मदद नहीं करता। कट्टरपंथियों के सामने वहां की सरकार नतमस्तक है। इमरान के शासन में भी वही स्थिति थी जो आज शाहबाज के शासन में है। वहां के शासन की बागडोर वास्तव रूप में सेना के हाथ में है। वहां की सेना भी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है। सरकार सेना के इशारों पर काम करती है। अगला कुछ दिन पाकिस्तान के लिए और मुश्किल भरा होगा। देखना है कि इस्लामाबाद हाईकोर्ट इमरान खान की अर्जी पर क्या फैसला देता है। इमरान को गिरफ्तार कर शाहबाज सरकार पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तथा अपनी पार्टी के कुछ अन्य नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को हटाना चाहती है। देखना है कि वर्तमान टकराव किस हद तक पहुंचती है।