आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज 8 मार्च से चार दिवसीय दौरे पर भारत पहुंच चुके हैं। भारत में उसका गर्मजोशी से स्वागत किया गया है। अल्बानीज दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर 11 मार्च को आयोजित होने वाले भारत-आस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी संबोधित करेंगे। गुजरात के अहमदाबाद स्थित नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में चल रहे भारत-आस्ट्रेलिया क्रिकेट मैच के दौरान क्रिकेट कूटनीति का नजारा देखने को मिला। बॉर्डर-गावस्कर ट्राफी टेस्ट शृंखला के चौथे मैच के दौरान भारत और आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टॉस होने से लेकर लगभग एक घंटे तक स्टेडियम में मौजूद रहे।

दोनों की उपस्थिति में दोनों कप्तानों ने टॉस किया तथा अपने-अपने देश का राष्ट्रगान गाया। इस मौके पर एक सांस्कृृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। मालूम हो कि नरेन्द्र मोदी स्टेडियम अहमदाबाद जिसमें 1.32 लाख दर्शकों के बैठने की क्षमता है। प्रधानमंत्री ने इस टेस्ट मैच के माध्यम से एक ऐसा राजनीतिक तड़का लगाया है जिसको देखकर आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री भाव-विभोर हो गए। खेल के माध्यम से दोनों देशों को जोड़ने का यह अनूठा प्रयास रहा। पिछले वर्ष मई में प्रधानमंत्री बनने के बाद अल्बानीज का यह पहला भारत दौरा है। उनके साथ व्यापार एवं पर्यटन मंत्री डॉन फैरल तथा संसाधन एवं उत्तरी आस्ट्रेलिया मामलों के मंत्री मेडलीन किंग एवं उच्च प्रतिनिधिमंडल भारत आया हुआ है। 11 मार्च को भारत-आस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन में व्यापक रणनीति पर चर्चा की जाएगी तथा महत्वपूर्ण समझौते किये जाएंगे। दोनों प्रधानमंत्रियों की बैठक में द्विपक्षीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श होगा।

रक्षा, आर्थिक एवं तकनीकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर विशेष पहल हो सकती है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र दोनों देशों के लिए  ज्वलंत मुद्दा है, जिस पर साझा रणनीति बन सकती है। चीन की आक्रामकता को लेकर भारत के साथ-साथ आस्ट्रेलिया भी परेशान है। चीन की बढ़ती दादागिरी के कारण उसके आस-पास के देशों में भय का माहौल है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देश काफी नजदीक आये हैं। इस साल के मध्य में आस्ट्रेलिया में चार देशों के संगठन क्वाड की बैठक होने वाली है। इस बैठक में भी चीन को घेरने की रणनीति पर विशेष चर्चा होगी। सितंबर में नई दिल्ली में जी-20 देशों के राष्ट्र प्रमुखों की बैठक होगी। इन दोनों बैठकों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन एवं विस्तारवाद को रोकने पर प्रस्ताव पारित किए जा सकते हैं। चीन की विस्तारवाद नीति को देखते हुए भारत भी चीन के पड़ोसी देशों एवं आसियान देशों के साथ अपना संबंध मजबूत कर रहा है। इसी वर्ष जापान में जी-7 देशों की बैठक होने वाली है।

जापानी प्रधानमंत्री इसी की तैयारी के सिलसिले में 19 मार्च को भारत आ रहे हैं। नई दिल्ली में हुए जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान जापानी विदेश मंत्री के नहीं आने से दोनों देशों के संबंधों में थोड़ी खटास आ गई है। प्रधानमंत्री किशिदा भारत की नाराजगी को दूर करने का भरसक प्रयास करेंगे। चीन का मुकाबला करने के लिए भारत और जापान दोनों को एक-दूसरे की मदद की जरूरत है। उम्मीद है कि आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के दौरे से दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे और व्यापार एवं निवेश बढ़ेगा।