पर्यावरण संरक्षण के लिए जल बचाने का संदेश देते हुए एसजीटी विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार को ‘राधा-कृृष्ण संग फूलों की होली’ समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में पूरे देश की लोक-संस्कृृति की झलक एक मंच पर देखने को मिली। गुजराती, हरियाणवी, मिजोरम, राजस्थानी, दक्षिण भारतीय, बॉलीवुड व ब्रज की होली पर नृत्य की प्रस्तुतियों के साथ ही विश्वविद्यालय का पूरा परिसर होली के रंगों से सराबोर हो गया। यहां की होली का रंग थोड़ा अलग जरूर था और वह रंग था फूलों की होली का। फूलों की होली पर्यावरण संरक्षण के लिए जल बचाने का संदेश देती है।
समारोह में एसजीटी विश्वविद्यालय के चांसलर पद्मश्री रामबहादुर राय, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, दशमेश एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट की चेयरपर्सन मधुप्रीत कौर चावला, मैनेजिंग ट्रस्टी मनमोहन सिंह चावला, संरचना फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक अमोघ देव राय व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। समारोह की शुरुआत वेलकम डांस- ‘ब्रजे बसंतम् नवनीत चौरम्’ से शुरू हुई। ‘होली आई रे’ गाने के बोल पर जब छात्र-छात्राओं ने गुजराती नृत्य गरबा करना शुरू किया तो पूरा पांडाल होली के रंगों से रंग गया। लोक नृत्य बिहू की प्रस्तुति से असम की मिट्टी की सोंधी सुगंध से पूरा माहौल सराबोर हो गया।
‘होलिया में उड़े रे गुलाल।’ राजस्थानी पारंपरिक नृत्य पर तो वहां उपस्थित सभी लोग होली के रंग में इस तरह रंगे कि वे इस नृत्य पर झूमते हुए नृत्य करने लगे। समारोह में हास्य पर आधारित कॉमेडी- ‘सबसे बड़ा मूर्ख’ को लोगों ने काफी सराहा। लोकनृत्य बैंबू डांस में मिजोरम की लोक-परम्परा की झलक देखने को मिली। समारोह के अन्य आकर्षण रहे- दक्षिण भारतीय लोक नृत्य और ब्रज की होली पर आधारित नृत्ए छात्र-छात्राओं ने अपने नृत्य के माध्यम से राधा-कृृष्ण की लीलाओं को मंच पर प्रस्तुत किया। महाराष्ट्र के कोली स्टाइल होली नृत्य का दर्शकों ने खूब आनंद उठाया।
हरियाणा के कोरड़ा होली लोक नृत्य ने इस राज्य की संस्कृृति से दर्शकों का परिचय कराया। पारंपरिक, शास्त्रीय व बॉलीवुड पर आधारित होली गीतों पर नृत्य ने पूरे माहौल को होलीमय बना दिया। ‘मीठे रस से भरी राधा रानी लागे।अब राधे रानी दे दारो बंसी मोरी। व खेलो मेलो होली खेलो।।।’ गीत पर जब एसजीटी विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने नृत्य करना शुरू किया तो ऐसा लगा मानो एसजीटी परिसर मथुरा-वृंदावन के माहौल में बदल हो गया है।