पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों त्रिपुरा, मेघालय एवं नगालैंड में फिर से भाजपा समर्थित सरकारें वापस लौटेंगी। त्रिपुरा में भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है। ऐसी स्थिति में अब सरकार बनना तय है। त्रिपुरा में प्रद्योत देबबर्मा के नेतृत्व वाली टिपरामोथा पार्टी ने 13 सीटों पर विजय हासिल कर यह दिखा दिया है कि भविष्य में यह पार्टी दूसरे दलों के लिए चुनौती बन सकती है। वामपंथी पार्टियां तथा कांग्रेस मिलकर भी भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने में विफल रही है। मेघालय में सत्ताधारी एनपीपी स्पष्ट बहुमत से थोड़ी पीछे रह गई है। लेकिन उम्मीद है कि भाजपा और दूसरे सहयोगी दलों के सहयोग से एनपीपी के नेता कोनराड संगमा फिर से मेघालय के मुख्यमंत्री बनेंगे। हालांकि भाजपा ने सभी 60 सीटों पर प्रतिद्वंद्विता की थी, किंतु उसे केवल 2 सीटों पर ही विजय मिली।

पिछले विधानसभा में भी भाजपा के केवल दो ही सदस्य थे। टीएमसी और कांग्रेस का प्रदर्शन भी मेघालय में निराशाजनक रहा। नगालैंड में एनपीपीएफ के नेतृत्व वाले गठबंधन को अच्छा बहुमत मिल गया है। मालूम हो कि भाजपा और एनपीपीएफ ने मिलकर चुनाव लड़ा था। ऐसी स्थिति में नेफ्यू रियो के नेतृत्व में सरकार बनना निश्चित है। नगालैंड में भी कांग्रेस को कड़ी शिकस्त मिली है। अगर हम तीनों राज्यों के चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो पता चलता है कि क्षेत्रीय दलों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा।

वर्ष 2014 से पहले पूर्वोत्तर के किसी भी राज्य में भाजपा की सरकार नहीं थी। पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में से पांच राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी, जबकि बाकी के एक-एक राज्य में वामपंथी पार्टी, एसडीएफ और एनपीएफ की सरकार थी। वर्ष 2019 आते-आते पूर्वोत्तर का सियासी नक्शा बदल गया। वर्ष 2016 से सरकारें बदलने लगीं। वर्ष 2019 आते-आते पूर्वोत्तर के आठ में सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार बन गई। भाजपा इतनी मजबूत हो गई कि त्रिपुरा में अपने दम पर सरकार बना ली। आज असम, अरुणाचल, मणिपुर और त्रिपुरा में भाजपा के नेतृत्व में सरकार है और बाकी राज्यों में उसके सहयोगी दलों के मुख्यमंत्री हैं। पूर्वोत्तर में भगवा दल के मजबूत होने का मुख्य कारण यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का फोकस पूर्वोत्तर के राज्यों पर है।

मोदी ने पूर्वोत्तर के राज्यों के विकास के लिए बजट में अलग से प्रावधान किया। मोदी के सत्ता में आने के बाद पूर्वोत्तर के लोगों को केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं का सीधे फायदा मिलने लगा। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद पूर्वोत्तर के राज्यों में काफी तेजी से विकास हुआ। इन राज्यों को एयर, रेल और रोड कनेक्टिविटी के जरिये देश के बाकी हिस्सों से जोड़ा गया। इससे लोगों की आमदनी बढ़ी तथा रोजगार मिला। यहां के युवाओं को कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा से जोड़ा गया। भाजपा ने युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान बना ली। प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर के राज्यों का लगातार दौरा कर यह दर्शा दिया कि उनके मन में पूर्वोत्तर के लिए विशेष प्यार है। यही प्रेम अब वोट में तब्दील हो रहा है।