हैदराबाद से 100 किमी उत्तर में चित्रियल में 4.1 अरब साल पहले की चट्टान का एक टुकड़ा मिला है। चट्टान का ये टुकड़ा मौसम रोधी खनिज जिरकोन का बना हुआ है। ये टुकड़ा धरती के शुरुआती वर्षों को लेकर नई जानकारी दे सकता है। प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी, हिरोशिमा यूनिवर्सिटी और नेशनल सेंटर फॉर अर्थ साइंस स्टडीज (एनसीईएसएस) के शोधकर्ता इस बात पर प्रकाश डाल सकते हैं कि धरती के शुरुआती के समय मौजूद रहे केमिकल्स का अंदाजा लगा सकते हैं और इससे धरती के शुरुआती आधे अरब सालों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
इसके निष्कर्ष हाल ही में ‘प्रीकैम्बि्रयन रिसर्च जर्नल’ में प्रकाशित किए गए थे। खबर के मुताबिक भूवैज्ञानिकों के अनुसार, जब हैडियन युग के दौरान पिघले हुए मैग्मा से पृथ्वी की पपड़ी बन रही थी, तब जिरकोन क्रिस्टलीकृत होने वाले पहले खनिजों में से एक था। इस खोज का हिस्सा रहे एक वरिष्ठ भूविज्ञानी ने कहा कि तेलंगाना में हेडियन जिरकोन की खोज से संकेत मिलता है कि पृथ्वी का प्रारंभिक इतिहास भारत में चट्टानों में छिपा हुआ पाया जा सकता है।
प्रेसीडेंसी भूविज्ञान के प्रोफेसर शंकर बोस ने कहा यह अहम है। आगे के अध्ययन से हमें पृथ्वी के पहले कुछ सौ मिलियन वर्षों में पानी की उपस्थिति सहित रासायनिक और भौतिक स्थितियों को समझने में मदद मिलेगी। भारत में हाल में हुई एक खोज से कुछ पुरानी एकमात्र खोज 2018 में ओडिशा में हुई थी, जहां केंदुझार जिले में टॉनलेटिक चट्टानें मिली थीं। यह खोज 4.2 अरब वर्ष से अधिक पुरानी होने का अनुमान लगाया गया था। इससे पहले 2016 में केरल के वायनाड और 2018 में ओडिशा में बैतरणी नदी में 4 बिलियन साल से थोड़ा ज्यादा पुराना जिरकोन पाया गया है।
पृथ्वी का सबसे पुराना जिरकोन (लगभग 4.4 बिलियन वर्ष) पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के जैक हिल में पाया गया था। भूवैज्ञानिकों का कहना है कि उस युग के कई अन्य खनिज और चट्टानें नष्ट हो गई हैं, लेकिन भौतिक और रासायनिक लचीलेपन की चरम सीमा के कारण जिरकोन समय की कसौटी पर खरा उतरा है।