पूर्वोत्तर के दो राज्यों मेघालय और नगालैंड में 27 फरवरी यानी सोमवार को विधानसभा चुनाव संपन्न हो जाएंगे, इसके बाद सबकी निगाहें दो मार्च को होने वाली मतगणना पर होंगी। त्रिपुरा में 16 फरवरी को विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुका है। ऐसे में दो मार्च को स्पष्ट हो जाएगा कि त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में अगली सरकार किन- किन पार्टियों की बन रही है। त्रिपुरा में फिलहाल भाजपा की सरकार है, परंतु इस बार उसे माकपा-कांग्रेस गठबंधन से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है,वहीं मेघालय में भी एनपीपी को कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है। संभव है कि नगालैंड में रियो और भाजपा की पार्टी मिलकर सरकार बना ले, फिर भी सच्चाई पर से पर्दा दो मार्च को ही उठ पाएगा, जिसका हमें इंतजार करना चाहिए। मेघालय में कुल 369 उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत दांव पर है।
कुल 3,419 मतदान केंद्रों पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे जिनमें से 640 को संवेदनशील, 323 मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील और 84 मतदान केंद्रों को अति जोखिम वाले केंद्र के तौर पर चिन्हित हैं, वहीं सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) जो सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। इस बार पार्टी को सत्ता विरोधी लहर से जूझना पड़ सकता है। यहां पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास की कमी इस बार प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक है। भ्रष्टाचार के और आरोप भी एनपीपी सरकार को सता रहे हैं, इसके अलावा जयंतिया और खासी पहाड़ियों में अवैध कोयला खनन का मामला भी चुनाव के नतीजों पर असर डाल सकता है। दूसरी ओर लगता है कि टीएमसी जिस उम्मीद से चुनाव लड़ रही है, उसकी उम्मीद फलीभूत होने वाली नहीं है, वहीं जिस तरह प्रदेश से कांग्रेस को खत्म माना जा रहा है, वह सच नहीं है।
कारण कि पिछले साल कांग्रेस के विधायक टीएमसी और अन्य पार्टियों में शामिल हो गए, परंतु राज्यवासियों के मन-मस्तिष्क में कांग्रेस अभी भी बरकरार है, परंतु वह चुनाव जीतकर सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच जाएगी, इसे पूरे विश्वास के साथ फिलहाल नहीं कहा जा सकता है। पिछले चुनाव में सभी पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में नौकरियों और चुनाव के अवसर पैदा करने का वादा किया था जो पूरे होते नहीं दिखे। मेघालय चुनावों में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा ईसाई और गैर ईसाई है। खासकर खासी पहाड़ी क्षेत्रों में ये मुद्दा अहम रहेगा। मेघालय में बीजेपी के चीफ अर्नेस्ट मावरी ने कहा कि राज्य में ईसाई लोगों की संख्या अधिक है।
पार्टी अगर चुनाव में जीत हासिल करती है तो वो राज्य में ईसाई की सुरक्षा पर खास ध्यान देगी। उन्होंने ये भी कहा कि गोमांस के सेवन पर भी प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। दूसरी ओर नगालैंड में सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच 16 जिलों की 60 विधानसभा सीटों में से 59 पर मतदान होगा। 59 विधानसभा क्षेत्रों के 2,315 मतदान केंद्रों पर मतदान दलों की आवाजाही शनिवार से शुरू हो गई। चुनाव में यहां 6,55,144 महिलाओं सहित लगभग 13 लाख मतदाता चार महिला उम्मीदवारों सहित 183 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला करेंगे। प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में उत्तरी अंगामी है जो एनपीडीडी उम्मीदवार और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के चुनाव भाग्य का फैसला करेंगे। राष्ट्रीय और राज्य दलों के 12 राजनीतिक दल मैदान में हैं।
सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि उसकी सहयोगी बीजेपी ने 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस ने 23 उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जबकि नागा पीपुल्स फ्रंट 22 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। राजद, लोजपा के रामविलास पासवान गुट, मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा के नेतृत्व वाली नेशनल पीपुल्स पार्टी और राकांपा सहित अन्य दल भी मैदान में हैं। साथ ही 19 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मेघालय और नगालैंड का चुनाव काफी महत्वपूर्ण है, जिसके परिणाम आगामी देश की राजनीति को प्रभावित करेंगे।