खेजड़ी वाले बालाजी का मंदिर राजस्थान के सीकर के सालासर रोड पर दस किलोमीटर दूर भींगणा गांव के मेन रोड से 2 किलोमीटर अंदर स्थित है जो आजकल आस्था का केंद्र बना हुआ है। सुजानगढ़ से 8 किमी दूर और प्राचीन सालासर मंदिर से 16 किमी दूर होने से इसकी महानता और भी बढ़ गई है। तीन द्वार वाले इस मंदिर में प्रवेश करने पर तीन कमरे बने हुए हैं। बड़ा पानी का पुल बना हुआ है फिर मुख्य मंदिर व बरामदा दिखाई देता है। पूर्व मुख वाले इस मंदिर में एक शिव परिवार का भी बड़ा मंदिर बना हुआ है। पिछले साल 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी पर राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा भी की गई जिसमें भगवान राम व सीता माता सहित लक्ष्मण जी बालाजी व गणेश जी की मूर्ति भी स्थापित की गई। इस खेजड़ी वाले बालाजी के निर्माण के साथ घटना जुड़ी हुई है जिसका उल्लेख करना श्रद्धा व आस्था के लिए जरूरी है।

भींगणा गांव के निवासी रामेश्वर लाल गहलोत की शादी 1972 में हुई थी तब वह गुवाहाटी में एक छोटी सी पान की दुकान चलाते थे। शादी के समय से ही उनकी पत्नी राजू देवी बीमार चल रही थी। उनके तीन बच्चे अधूरे हुए डॉक्टरों ने कहा कि इनकी बच्चेदानी खराब हो गई है उसे निकालना पड़ेगा और आज के बाद इनको संतान सुख की प्राप्ति नहीं होगी। राजू देवी सुजानगढ़ के नजदीक डूंगर बालाजी की भगत जी उन्हें मन में यह एहसास हुआ कि डूंगर  बालाजी का आदेश हुआ है कि वह अपने पति के साथ गुवाहाटी चली जाए और अगर गुवाहाटी में कोई तकलीफ हो तो वह बालाजी की तांती बांध लेवे किसी प्रकार की कोई दवाई का ग्रहण न करें। मगर गहलोत की हालत इधर में बहुत खराब थी। वह एक छोटी सी पान की दुकान में मुश्किल से गुजारा कर रहे थे फिर भी  उन्होंने हिम्मत नहीं हारी व बालाजी पर विश्वास करके अपनी पत्नी को गुवाहाटी लेकर आ गए।

डूंगर बालाजी को सुजानगढ़ में है वहां से ही बालाजी की आस्था व विश्वास ने अपना चमत्कार दिखाना शुरू कर दिया। पत्नी की तबीयत धीरे-धीरे ठीक हुई व राजू देवी ने तीन लड़का एक लड़की को जन्म दिया। दो लड़के मंगलवार को एक लड़का पूर्णिमा के दिन व लड़की रक्षाबंधन के पहले दिन हुई। यह डिलीवरी घर के अंदर हुई कारण दवाइयां डॉक्टर की बालाजी महाराज की मनाई थी। गहलोत के पहले पुत्र होने से ही खेजड़ी वाले बालाजी का चमत्कार शुरू होता है। भींगणा गांव के पास गहलोत ढाणी है वहां एक वृद्ध दंपति छोटी सी खेजड़ी के नीचे छोटे से मंदिर की पूजा करते थे। दंपति की मृत्यु हो गई तो 7 साल मंदिर बंद पड़ा रहा। खेजड़ी के वृक्ष के नीचे मंदिर की हालत खराब हो गई। इसके बाद गहलोत को रोज सपने में मंदिर दिखाई देता वहां एक साफ दिखाई देता और बोला पहले मेरा मंदिर खोलो। तब आपको घर जाने दूंगा।

आर्थिक तंगी के बावजूद गहलोत सात रुपए के साथ गांव की ओर प्रस्थान किया। अपने घर से पहले मंदिर पड़ता है। रास्ते में उनको एक सांप दिखाई दिया दो बंद पड़े मंदिर के पास जाकर गायब हो गया। गहलोत ने सारा मांजरा भांपकर गांव वालों को इकट्ठा करके उन्हें बोला कि मैं मंदिर खोलूंगा। वह बोले कि तुम्हारे पास क्या साधन है, मैंने कहा था मेरे को खाना मिलेगा तो बालाजी को भी सेवा करूंगा। तब गांव वालों ने भी मेरा साथ दिया। तब मैंने कहा वहां कोई पूजा कर दोगे क्या। तब वहां के जैसा दास जी स्वामी बोले कि पूजा तो मैं कर दूंगा। मैंने कहा क्या लोगे पूजा करने का तो बोले जो आप दोगे वही ले लूंगा। उन दिन 10311 का मंदिर बनाकर प्राण प्रतिष्ठा की। फिर गहलोत का काम अच्छा से चलने लग गया। उसके बाद हनुमान जयंती और शरद पूर्णिमा पर दो जागरण छोटे रूप में कर दिए। धीरे-धीरे मंदिर की ख्याति होने लगी।