रूस-यूक्रेन युद्ध के एक साल पूरे हो गए हैं, किंतु यह रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था। आज स्थिति यह है कि न तो अभी तक रूस की जीत हुई है और न यूक्रेन का हार। अब यह युद्ध खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है। रूस की जीत के बीच सबसे बड़ी बाधा अमरीका और नाटो संगठन हैं। अमरीका और नाटो के देश लगातार यूक्रेन को उन्नत हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध करवा रहे हैं। अमरीका यूक्रेन के माध्यम से रूस को कमजोर करना चाहता है, लेकिन रूस मानने को तैयार नहीं है। अमरीका के साथ-साथ ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड जैसे देश यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति कर रहे हैं। अब आस्ट्रेलिया भी यूक्रेन को हथियार देने वाले देशों की सूची में शामिल होने जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से ऐसा लग रहा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध ठंडा पड़ रहा है। लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा ने एक बार फिर युद्ध की चिंगारी को भड़का दिया है।

बाइडेन ने यूक्रेन की धरती से यह घोषणा की है कि अमरीका यूक्रेन के साथ अभी भी खड़ा है तथा आगे भी मजबूती से खड़ा रहेगा। बाइडेन ने यूक्रेन को रूस से लड़ने के और हथियार देने की घोषणा की है। बाइडेन की इस घोषणा ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को और भड़का दिया है। रूसी राष्ट्रपति ने मंगलवार को कहा कि मास्को शीतयुद्ध समय के स्टार्ट संधि को तत्काल निलंबित कर रहा है। इसका अर्थ यह है कि रूस परमाणु अस्त्र नियंत्रण संधि से बाहर हो रहा है। इस घोषणा के बाद रूस के परमाणु परीक्षण केंद्रों पर गतिविधियां बढ़ गईं हैं। इसका अर्थ यह है कि दुनिया अब परमाणु युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। मालूम हो कि अमरीका और रूस के पास 12 हजार से ज्यादा परमाणु हथियार हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अगर परमाणु युद्ध शुरू हुआ तो पहले दो घंटे के अंदर नौ करोड़ लोग मारे जाएंगे। अमरीकी हथियारों की खेप आने से पहले रूस ने डोनबास्क तथा कुछ अन्य जगहों पर मिसाइलें तेज कर दिये हैं। यूक्रेन के बाखमुत शहर में दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे पर जोरदार हमले कर रही हैं।

अब चीन द्वारा रूस को खुलेआम समर्थन देने से स्थिति और जटिल होने वाली है। ऐसी खबर है कि बाइडेन के यूक्रेन यात्रा के बाद चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग रूस के साथ एकजुटता दिखाने के लिए मास्को की यात्रा करने वाले हैं। अगर चीन सीधे तौर पर रूस के समर्थन में आ गया तो अमरीका और नाटो देशों के लिए विकट स्थिति पैदा हो जाएगी। अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन ने चीन को सीधी धमकी देते हुए कहा है कि वह रूस को हथियार देने से बाज आए। मालूम हो कि अमरीका द्वारा ताइवान को समर्थन देने से चीन भड़का हुआ है। जासूसी गुब्बारे मामले के बाद दोनों देशों अमरीका-चीन के बीच तनाव चरम पर है।

यही कारण है कि चीन रूस को समर्थन देकर अमरीका पर दबाव बढ़ाना चाहता है। इसी बीच शांति बहाली के लिए भी प्रयास चल रहे हैं, किंतु अभी तक इस क्षेत्र में कोई सफलता नहीं मिली है। भारत लगातार शांति स्थापित करने के लिए प्रयास कर रहा है। अमरीका और रूस के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई में यूक्रेन बर्बाद हो गया है। दोनों ही पक्षों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ शांति के लिए आगे बढ़ना चाहिए। परमाणु युद्ध में न तो किसी की हार होगी, न ही किसी की जीत, बल्कि दुनिया का विनाश होगा।